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मई, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
उन मुस्कुराहटों पे जब से ग़म के  पहरे हुए है ख़ुशियों  से मिलने को छटपटाती रोज़ हैं ।
ना रक्खो दिलों में गिले-शिक़वे कोई अब ज़िंदगी में दोस्ती के पल मुश्किल से मिलते हैं । 
हर शख़्स कला का कद्रदान नहीं होता कुछ यूँही हर हुनर का सबब पूछते हैं । 
 ज़िंदगी हर वक़्त आसान होती नहीं मुश्किल बिना शख़्स की पहचान होती नहीं अपने पराये का पता वक़्त बता देता है यूँही ये उलझन आसान होती नहीं बड़े सब्र से गुज़ारी है ज़िंदगी बिना  आँसू कभी मुस्कान होती नहीं