'निम्न से ही उच्च है "
रुतवा और प्रतिष्ठा का अर्थ कभी भी व्यक्तिगत या सीमित मायनो में नहीं लिया जा सकता । ये व्यक्तिगत या एकात्मक तौर पर अर्थहीन हैं । इन्हें अपना अस्तित्व पाने के लिए पराश्रित होना पड़ता है । इस वाक्य का अर्थ ये है कि इंसान प्रसिद्ध होने के लिए, सम्मान पाने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति या समूह विशेष पर निर्भर करता है । इंसान अपने आप में कितना ही गुणी या प्रतिभावान क्यों न हो जब तक उसकी प्रतिभा की कद्र करने वाले ,उसके गुणों को पहचानने वाले या स्वीकार करने वाले लोग नहीं होंगे वह व्यक्ति प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं कर पाएगा । इसलिए इस सम्मान को पाने के लिए हमें अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन के साथ-साथ दूसरों को प्रभावित करना ,उनके विचारों को समझना और उनकी प्रतिक्रियाओं को सकारात्मक आधार भी प्रदान करना होता है । हर इंसान अपना रुतवा पाने के लिए ,अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए, उसे सिद्ध करने के लिए दूसरों पर निर्भर है । ये दूसरे की सोच है , उसका अपना निर्णय है कि वह आपको प्रतिभावान मानता है या नहीं । वो आपमें सब कुछ होते हुए भी आपका सम्मान करता है या नहीं । यदि आपकी प्रतिभा...