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'नन्ही सी गुड़िया अब बड़ी हो गई'(poem)

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तस्वीर  -साभार  गूगल  लड़खड़ाती वो जाने कब खड़ी हो गई वो नन्ही सी गुड़िया अब बड़ी हो गई आई जिस पल वो मेरी दुनिया मे खुशी बन के मुबारक वो सबसे घड़ी हो गई. संवार कर मंकां  को उसने घर कर दिया  वो  हुनारवाजों  में  सबसे  बड़ी  हो  गई. मचल  जाती  थी जो छोटी -छोटी  बातों पर  समझदारी की  पक्की  कड़ी  हो  गई  रहता था हर वक्त नाक पे जिसकी गुस्सा  ख़ुशमिज़ाज, अब वही नकचढ़ी हो  गई . समझा बोझ  जिसको पक्षपाती नज़र ने मुद्रिका  वो  नगीना ज़डी हो  गई . चेहरे  की  मुस्कान  बन  गई  वो सभी  की , वो  दिपावली की  फुलझड़ी  हो  गई . -अंशु चौहान