दिल में किसी को कैद करो तो जाने न दो सहेज कर इस कदर रखो के छटपटाने न दो आदत सी हो जाए इस कैदख़ाने की आशियां कहीं और बनाने न दो ये सवाल मोहब्बत का है फिर भी बंदिश की घुटन खयालातों में आने न दो पा ही लीं हैं जो घड़ियाँ उसे आजमाने की आवारा पंछी की तरह उसे उड़ जाने न दो ।
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हद है कहूँ तो
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लेखक:
Anshu chauhan
मोहब्बत में किसी की खुद को मिटाना हद है कहूँ तो रातों को उठ -उठ आंसू बहाना हद है कहूँ तो गए अब लैला ,मजनू के ज़माने प्यार की क़समें यूँ खाना हद है कहूँ तो ये इश्क आज -कल का सच्चा नहीं होता तन्हाइयों में दिल को जलाना हद है कहूँ तो दिल की लगी से कुछ हासिल नहीं होगा बग़ावत उसूलों से करना हद है कहूँ तो। इस आवारा दिल की फ़ितरत अजब है बातों में इसकी हर बार आना हद है कहूँ तो ।