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दिल में किसी को कैद करो तो जाने न दो सहेज कर इस कदर रखो के छटपटाने न दो आदत सी हो जाए इस कैदख़ाने की आशियां  कहीं और बनाने न दो ये सवाल मोहब्बत का है फिर भी बंदिश की घुटन खयालातों  में आने न दो पा ही लीं हैं जो  घड़ियाँ  उसे आजमाने की आवारा  पंछी की तरह उसे  उड़ जाने न दो । 
ये' ख़ुशी 'एक इवादत है इसकी पूजा किया  करें  ये एक 'प्रसाद'' है ख़ुदा का जो सब को  दिया  करें । 

हद है कहूँ तो

मोहब्बत में किसी की खुद को मिटाना हद है कहूँ तो रातों को उठ -उठ  आंसू बहाना हद है कहूँ तो गए अब लैला ,मजनू के ज़माने प्यार की क़समें यूँ खाना हद है कहूँ तो ये इश्क आज -कल का सच्चा नहीं होता तन्हाइयों में दिल को जलाना हद है कहूँ तो दिल की लगी से कुछ हासिल नहीं होगा बग़ावत उसूलों से करना हद है कहूँ तो। इस आवारा दिल की फ़ितरत अजब है बातों में इसकी हर बार आना हद है कहूँ तो । 
उसके अहसास  में  मेरा होना काफ़ी  है  कब मैंने उसका साथ पाने की हसरत की है