संदेश

2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

'नूतन वर्ष'

चित्र
बीते बरस की बीती बातें,नूतन का अभिनंदन हो , शुभ विचार ,प्रफुल्लित  मन से ,प्रभु चरणों में  वंदन हो . संकल्प नए कुछ, सोच नई हो,बुरी आदतों का मर्दन हो ऊर्ज़ावान हो, मन उल्लासित,हर भाव सुधा हो , चन्दन हो दीन -हीन व्याकुल जन हित ,उदार जनों का संबल हो वैचारिक मतभेद से उपजे, रुग्ण सम्बंध पुनरूर्जित हों  . हो वैभव ,सुख -संपन्न देश , ना कहीं करुण,भयाभय  क्रन्दन  हो . ये नयावर्ष सुमधुर गीत हो ,मन -मयूर नृत्य हित उन्मत हो . -अंशु चौहान

'देश की अखण्डता' (मेरे विचार )

चित्र
हमें भारतीय  होने  पर  गर्व  है .मेरा  भारत  महान है . हम अपने  देश  के लिए जान दे देंगे ,भारत  हमारी  आन-बान, शान है आदि ये  सब बातें बोलते तो लगभग हम  सभी  हैँ,  मगर  कोई  मुझे  ये बताए  कि  'भारत'है क्या ? क्या  ये  किसी  ज़मीन के  हिस्से  का  नाम  है ?क्या  किसी  व्यक्ति   विशेष  का  नाम  है ? नहीं  ना ...? हम सभी लोग, चाहे हिन्दू ,मुस्लिम ,सिख ,ईसाई किसी भी धर्म से  हों ,किसी  भी  राज्य  से  हों ,हम सभी जब   एकसाथ हैँ तभी  बनता  है   'भारत' .'भारत'अपने आप में अलग  से  कुछ  नहीं  है . जब  हम  कहते  हैँ  कि  हमारा  देश,  तो  इसका  मतलब  होता  है इस  देश  में  रहने  वाले  सभी  लोग ,चाहे  वो   किसी  भी  जाति ,धर्म  या  संप...

ए पुरूष! (Poem)

चित्र
ए पुरूष!  तू  जिससे उत्पन्न हुआ जिसके संरक्षण में रहकर खड़ा हुआ जिसकी लोरी सुनकर बड़ा हुआ जिसके ममत्व भरे स्पर्श से जागृत हुआ जिसका मन  तेरी पीड़ा से द्रवित हुआ जिसकी छाती से लग तू,करुण रुदन से मुक्त हुआ असहाय ,विवश ,वही  दीन -हीन तू ,उस पर अब बल आज़माता है . मत भूल वो जगत जननी है तुझे  जीवन उससे प्राप्त हुआ तू याचक,आश्रित उसके आगे हरदम वो तेरी जीवन दायनी है उसी नारी हित मन में ग़र तेरे सम्मान नहीं तू पतित ,अधर्मी ,दुराचारी , मृत्यु- दण्ड  अधिकारी  है . -अंशु चौहान

पक्षी सुरक्षा हित में ,एक सोच

चित्र
"जान तो जान ही है ना आखिर' ??.. सांभर झील में पक्षियों की मौत के प्रति सभी   की चिन्ता वाजिब है.होनी  भी चाहिए .पक्षियों  की इस तरह अकाल ,दर्दनाक मृत्यु बड़ी ही दुखद घटना है. काश यही पीड़ा हमें उन मुर्गों, बकरों ,..... आदि के लिए भी होती जिनको अपनी  जीभ  के  स्वाद हेतु  ना  जाने  कितनी  बेरहमी  से  एक  झटके  में  खत्म  कर दिया जाता  है .जिनकी तड़प किसी को  महसूस  नहीं होती है ,जिनको बचाने के लिए कोई आवाज नहीं  उठती है  . मुझे तो हर पशु-पक्षी  की अकाल, अप्राकृतिक मृत्त्यु  दुखी  करती  है.आखिर कैसे हम  किसी  एक  पक्षी  या पशु  पर  तो दया , और  अन्य  पर  क्रूरता  दिखा  सकते  हैं .??जीव  तो  सभी  में  एकसा  होता  है .दर्द  भी  सभी  को  समान ...क्या कुछ पक्षियों  व  जानवरों  को अपने  स्वाद  हेतु  बेरहमी  से  मा...

हम उलझ गए बस (poem)

चित्र
हम उलझ गए बस मंदिर ,मस्जिद ,गुरुद्वारे में ना राम लड़े ,ना अल्लाह लड़े ,ना नानक  किसी  ज़माने  में . विवाद ,कलह ,द्वेष ,प्रतिशोध  के भाव  भरे बस मानव  में , ईश्वर का कोई राग नहीं है खुद को पूजे  जाने  में . प्रेम ,दया ,सदभाव धरे हैं जिस मन  के शुभ -आँगन में , राम बसे ,अल्लाह बसे ,सर्व- ईश  (एक ईश्वर )बसा उसी हृदयालय में . देश -प्रेम ,सर्व -हित चरम का भाव धरे जो मानव उदार -मन  पावन  में , बिन मस्जिद ,मंदिर ,गुरुद्वारे ,प्रभु  उत्सुक हों ,वहीं  बुलाए  जाने  में . अखंड देश की बात करें  और  सदभाव बहे  हर  धारा  में , रक्त बहा कर  हिंसा से कब  प्रसन्न हुए, ईश्वर पूजे  जाने  से . -अंशु चौहान

पुत्र और पुत्री संग हो समान व्यवहार '

चित्र
हम अक्सर हर क्षेत्र में समानता की बात करते  हैँ परंतु हर वक्त एक ग़लती कर बैठते हैँ .हम एक पक्ष विशेष की श्रेष्ठता प्रतिपदित  करने हेतु ,उसके अधिकारों की  रक्षा  हेतु  दूसरे  को हीन और असुरक्षित बना देते हैँ.उदाहरण के लिए हमारे समाज में जब बेटे की स्थिति उच्च थी, तो बेटी  की निम्न थी .उस असमानता से  जब  मन व्यथित हुआ तो हमने बेटियों के हित  हेतु ,उनकी  महत्ता  स्थापित  करने  हेतु  प्रयास  और  प्रचार  करने  शुरू  किए .लडकों की  महत्ता लड़कियों से निम्न  बताने  की  कोशिश  की गई ,विभिन्न विडियो और विज्ञापन  के माध्यम  से .परिणाम स्वरूप  फिर असमानता  पैदा  हो  गई  है .कई जगह लड़कों के साथ लड़कियों की अपेक्षा कम  स्नेह पूर्ण  या अति  पक्षपात पूर्ण  व्यवहार  किया  जा  रहा  है. जब  बात  समानता  की  करनी  है तो व्यवहार  भी  दोनों  के  साथ  समान...

चन्दलई लेक (जयपुर)

चित्र
जयपुर से लगभग 25 किलोमीटर दूर चन्दलई झील है .काफी खूबसूरत झील है ये. लेकिन सफाई  की व्यवस्था  यहाँ चरमराई हुई  है.साथ ही आस -पास  फैली बेतरतीब झाड़िय़ाँ सोचने पर मज़बूर कर देती  हैँ .अगर इस स्थान पर  थोड़ा ध्यान दिया जाए  और  इसके  विकास  के  हेतु  कुछ  सोचा जाए तो ये बहुत सुन्दर टूरिस्ट प्लेस के रूप  में  विकसित हो सकता है .मैं  जानती हूँ कि इस विषय पर    समाचार पत्रों मेँ पहले भी काफी  कुछ प्रकाशित किया जा चुका है. मगर तब तक मैने इस स्थान को  विजिट नहीं किया था .लेकिन अभी एक दो दिन पहले जब मै यहाँ पहुँची तो मैने पाया की ये एक खूबसूरत झील हैँ .अगर कुछ प्रयास किए जाएं तो ये बिना किसी संदेह के बहुत  खूबसूरत भ्रमण स्थल बन  सकता हैँ .यहाँ की झाड़ियों की  कटिंग कर दी जाए, चारों तरफ का क्षेत्र साफ करके बेरिकेडिंग कर दी जाए ,बेंचेज लगा दी  जाएं ,बोटिंग की व्यवस्था कर दी जाए ,पानी की स्वच्छता  बनाए रखने हेतु कुछ सोचा  जाए ,साथ ही आस -पास कुछ -एक दूरी पर छोटी -छोटी खान...

'नन्ही दुलारी '

चित्र
पापा के काँधे पर रख सिर ,वो जाने कब सो जाती थी आँख खुले तो माँ फिर उसको ,लोरी गा के सुलाती थी जिसके हँसने पर खुश होते ,रोने पर मुर्झाते थे अपने सब सपनों की बलि वो, जिसके लिए चढ़ाते थे सोच -सोच आज चिंतित हैं बैठे हो कर सयानी कैसे गुज़रेगी ,दहशत भरी उन राहों से जहाँ डगर -डगर पर मैले मन का,हर एक अमानुष बैठा है | स्नेह -दुलार से पली -बढ़ी ये ,कैसे जग की कुटिल चाल पढ़ पाएगी नाज़ुक मन ,कोमल शरीर से ,दुष्टों का कैसे वध कर पाऐगी जहाँ कन्या से लेकर वृद्धा तक की ,अस्मत को ही ख़तरा हो उस धरा पर नामुमकिन है कन्या -अभिभावक, दुश्चिंताओं से मुक्त रहें अब चिंता बेटी के मात-पिता  की ,अपनी चिंता बनालो वरना पाप ,अधर्म का खुद को ,भागीदार कहला लो नन्ही -नन्ही कलियाँ भी  जहाँ, पशु पैरों से  रोंदी जाऐगी उस गुलशन की फुलवारी का,संरक्षण आख़िर कैसे होगा हुआ  नारी मन पीड़ित ज़रा भी ,अभिशापित पूरा जगत होगा | | - ...

भावावेश घातक है ..

चित्र
भावावेश में लिए गए निर्णय बहुत घातक  सिद्ध  होते  हैँ .भावावेश  तो विपरीत परिस्थितियों से उत्पन्न क्षणिक ही  होता  है और  कुछ  समय  बाद  सामान्य हो जाता है  परंतु उस समय  विशेष  में  लिया गया  ग़लत निर्णय पूरी  ज़िन्दगी बर्बाद कर देता है .इसलिए  कभी  भी , किसी परस्थिति में आवेश  में आकर  निर्णय न  लें . विश्वास  रखिए जिस तरह अनुकूल  समय  हरवक्त  नहीं  रहता ,उसी तरहा प्रतिकूल  समय  भी  हरवक्त  नहीं  रहेगा .ज़िन्दगी  को  आशान्वित होकर जिए .समय भी  अनुकूल  हो  जाएगा .खुद  को टूटने  ना  दें ,बिखरने  ना  दें.यही ज़िन्दगी  को  जीने  का  सही  नज़रिया है . 

इंसान का बॉस (मस्तिष्क )

चित्र
हर इंसान का एक ऐसा बॉस(मस्तिष्क ) होता है जिसके आदेशों की अवहेलना वो किसी भी कीमत पर  नहीं कर  पाता  है .सुबह  से  शाम  तक हर वक्त उसे, उसके ही आदेशों  के  हिसाब  से  बर्ताव करना पड़ता है .ये  कहता है  बैठ  जा  तो  बैठ जाता है  ,खड़ा  हो तो  ...इसके आदेशों  की  पालना  करने  में  ही  हमारी  भलाई  है  मगर सही  आदेशों  की  ही ,और  इसका  निर्धारण  करेगा  विवेक  जो  इसी  से  उत्पन्न  है .इसलिए मस्तिष्क  को  स्वस्थ  रखें  और  सही  दिशा निर्देशन  प्राप्त  करते  रहे .सोच  सही  तो  निर्णय  और  जीवन सही .

'दुविधा' .

चित्र
बड़ी  दुविधा सी रहती है हर वक्त ,ये निर्णय नहीं ले पाती कि सांसारिक जीवन  की  सफलता को  उद्देश्य  रखूँ  या आध्यत्मिक .सुनती और पढ़ती तो  यही  आई  हूँ  अक्सर  कि  मनुष्य जन्म बड़ी  मुश्किल  से  मिलता  है,इसे ईश्वर प्राप्ति में लगाना  चाहिए . किसी से मोह  नहीं रखना  चाहिए .लेकिन सांसारिकता के  लिए  मोह  मुझे  लगता है थोड़ा तो  ज़रूरी है .किसी  भी क्षेत्र में सफल होने के लिए उसके प्रति मोह की  ज़रूरत तो  रहेगी ही .मोह के  वशिभूत  होकर  ही हर  व्यक्ति  रिश्ते निभा रहा है .हर  कर्म कर  रहा है.जिस दिन निर्लिप्त भाव  से  कोई ये  कर्म और दायित्व निभाएगा उसी  दिन  से वह योगी और आध्यत्मिक कहलाएगा  .सफलता ,नाम,शोहरत  इन सब  चीजों के प्रति मोह ,ये ही तो सांसारिकता के लक्षण हैँ .इंसान जब  हर  तरह का  मोह ,इच्छाएँ त्याग  देता  है  तभी अध्यात्म से और  ईश्वर  स...

'हिन्दी एक समर्थ भाषा'

चित्र
हमारे  देशवासियों  की  एक  वृत्ति,बड़ी  ही विचित्र  है .यहाँ कोई  भी व्यक्ति  अपनी  कमज़ोर  हिन्दी  से परेशान  नहीं  होता है, वरन  अपनी  कमज़ोर  अंग्रेजी  से  परेशान  रहता  है .हिन्दी  का ज्ञान चाहे  कितना ही अधूरा और न्यूनतम  हो  परंतु  अंग्रेजी में पूर्णता और दक्षता ज़रूरी है .अपनी  ही भाषा  का  अपमान  करने  में ,उसकी  कम  जानकारी  रखने  में  कई  तो  अपनी  शान  समझते  हैं .मानो  इस  देश  के  वासी  ना  होकर  कहीं  अन्यत्र  से  आये  हों . मानती  हूँ  कि  हमने  अंग्रेजी  को  आज  इतना  उच्च  स्थान  प्रदान  कर दिया   है कि इसके  बिना किसी भी क्षेत्र  में  सफलता  अर्जित  कर पाना  आज  मुश्किल  सा  हो  गया  है लेकिन अपने...

शेर व कोट्स( swarachit) .

चित्र
   रूह तक बात को हर कोई लेने लगा है अब शायर हर कोई होने लगा है . -अंशु चौहान प्रेम जितना मर्यादित और शालीन होता  है,  उतना ही अधिक आकर्षक और श्रेष्ठ दिखता  है . -अंशु चौहान- कुछ लोग इस तरहा जिए कि खुद के लिए औरों को बलि चढ़ा गए,और कुछ इस तरहा जिए कि   के लिए,खुद की  साँसे  गवां  गए .-अंशु चौहान

'माँ जगदम्बा '

चित्र
पावन  रुप ,शीतल  छवि,हे करुणामयी !मैं तुम से मोहित  हूँ उन्नत- चरित्र  ,गरिमामयी ,मनमोहनी !मैं तुमसे मोहित हूँ  . पतित - तारिणी  ,क्षमादायिनी ,जीवन -सुधा ! मै तुम से मोहित हूँ निश्छल -मना,ओजस -प्रभा ,उज्ज्वल मुखी ,सुरागिनी ! मै तुमसे मोहित हूँ दुख -पीर  घटा ,सुख -नीर  बढ़ा ,हे सुख -प्रदायिनी, मै तुमसे मोहित हूँ . पाप -विनाशक ,शत्रु  -नाशक ,जीवन  संजीवनी,  मै  तुमसे मोहित हूँ . विषय -वासना मे हम बंधक ,हे  मुक्ति प्रदायिनी,मै  तुमसे मोहित  हूँ . -अंशु  चौहान

'माता के संस्कार'

चित्र
हे माताओं, देश के लिए ,हम सब के लिए ,शहीद होने  वाले ,बिना किसी रिश्ते  के  हमारे प्राणों के लिए अपना  सीना  छलनी करवा लेने वाले, उन तमाम सैनिकों पर रहम खाओ !मत  पथ -भ्रष्ट  होने  दो  अपनी  संतानों  को ,मत आशा  रखो उनसे किसी भी अनुचित तरीके से बस  अमीर  बन  जाने  की, मत  लालसा  पैदा  करो  उनमे किसी  का  भी  अहित  करके ,किसी  को  भी  दुख  पहुँचाकर स्वं  के  लिए  सुख ,सुविधाएँ  अर्जित  करने  की .उन्हे शिक्षित  करो  कि  तुम्हे  कुछ  भी  अर्जित  करना  है  तो  अपनी  मेहनत  से ,अपनी योग्यता  से . उन्हे  समझाओ  कि गरीबी  कोई  आनुवांशिक बीमारी  नही  है .तुम  परिश्रम ,ईमानदारी और अपने  कर्म  मे  गहरी  निष्ठा  रखकर  इससे  मुक्ति  पा  सकते  हो .अनुचित  तरीके  से  धन ...

'परस्पर निर्भरता '

चित्र
दुनिया का कोई भी इंसान कभी भी पूरी  तरह आत्म निर्भर नही हो सकता.यदि कोई ऐसा सोचता है तो  वह भ्रम  मे है.बचपन से लेकर बड़े होने तक किसी न किसी पर निर्भरता बनी ही रहती है.जब वह छोटा होता  हैँ तो माँ पर ,बड़ा  होता हैँ तो बाप  और दोस्तो पर.कोई व्यवसाय या जॉब  करता है तो अपने सहकर्मियो पर. यहाँ तक की अपनी कला ,प्रतिभा ,योग्यता के खरेपन(गुणबत्ता)की जांच के लिए भी अन्य के निर्णय पर निर्भर करता है. कितना अजीब है ना कि तुम किसी चीज मे योग्य हो इसका निर्धारण भी दूसरे करते  हैँ .तुम्हारा खुद का कुछ भी नही है.तुम्हारे मानने से नही बल्कि दूसरो की स्वीकृति से तुम स्थापित होते हो.दूसरों की अस्वीकृति तुम्हे असफल और स्वीकृति सफल बनाती है.दूसरो की रूचि ,उनका मत,उनका चुनाव ही तुम्हारी पहचान उजागर करता है. पूरी दुनिया ही परस्पर निर्भरता से चल रही है.चाहे कोई भी व्यवसाय या उद्योग सेवा हो.इसलिए आपकी पहचान ,शख्शियत आपकी नही बल्कि दूसरो के द्ववारा दी गयी है.किसी भी तरह का अहंम पालना . -अन्शु चौहान

"वो गौरवशाली देश लौटा दो '' .

चित्र
मै देश प्रेम की बात करूँगी , तुम विस्मृत संस्कृति लौटा दो मै वीर भूमि की बात करूँगी ,तुम वो पराक्रमी जन लौटा दो . अधर्म ,द्वेष,अनैतिकता के अनुचर, हुए यहाँ निवासी हैँ . मै नत्मस्तक हूँ तो बस अपनी धरती के उस शूरवीर पर जिसके हाथों मे सुरक्षा ,और देश की  थाती  है . स्वार्थ  रहित ,उत्सर्ग  जिनका पूरी  दुनिया  गाती  है तुम उन वीरों की वो, शहीद -स्थली लौटा  दो . मै  देश -गर्व की बात करूँगी, तुम वो खोया गौरव लौटा दो . जहाँ स्त्री -मान रक्षार्थ खड़ा हो ,पौरूष बल तल्वार लिए मै उस पुरूषत्व को  तिलक करूँगी ,तुम जन -मन मे वो प्रबल  नैतिक  स्वीकृति लौटा दो . मै  देश प्रेम की बात करूँगी तुम विस्मृत  संस्कृति लौटा दो -अंशु चौहान

''नव वर्ष "(poem)

चित्र
लिए  हाथ मे थाल तुम्हारा अभिनन्दन करती हूँ रहो श्रेष्ठ  गत वर्ष से  ज्यादा ये वन्दन करती हूँ बीते  साल  के  स्वप्न  अधूरे, तुमको  पूरे  करने  हैँ मेरी ख्वाबों की  दुनिया मे ,रंग हकीकत के भरने हैँ भूलूँ  साल पुराना पल मे  ,तुम उससे ज़्यादा दे जाना भूतकाल को विस्मृत कर दूँ ,तुम इतने सुख दे जाना . वर्तमान मे जीना हर पल ,ये ही तो समझदारी है तुम  संभालो अब अपनी सत्ता ,तुम्हारी ज़िम्मेवारी है . -अंशु  चौहान