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'ना होती है तुमसे ..(स्वरचित गीत) )

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 (स्वरचित गीत ) ना होती है तुमसे मुलाकात तो ,दिल को आराम नहीं मिलता  हर पल ये ढूंढे नज़र बस तुझे,तेरा पता ही  नहीं  मिलता  1.मुझे तू संभाले ,तुझे मैं सँभालू   तेरे दिल में अपनी जगह मैं बना लूँ  बस जाए मेरी  धड़कनों में जो, ऐसा आगाज़ नहीं  मिलता. ना होती है.   .    . .     2. तसव्वुर  में मेरे  दिन - रात होकर  यादों में मेरी आँखें  भिगोकर चुरा ले जो मुझसे ,मेरी धड़कनों को ,ऐसा आराम  नहीं मिलता . -अंशु चौहान                         

"कुछ तो मतलब रखती हैं"(कविता)

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  मै कुछ बोलूँ पर तेरी  खामोशी, कुछ तो मतलब  रखती हैं. मेरे साथ में तेरी य़ादें ,कुछ तो मतलब रखती हैं.  पास रहुँ तो यहाँ- वहाँ पर नजरें,दूरी में मेरी ही बातें कुछ तो मतलब रखती हैं. बुझा-बुझा सा हाल हैं दिल का ,गरम तवे पर जली सी रोटी कुछ तो मतलब  रखती है. मेरे पास में घंटों रुकना ,गैरों संग चन्द लमहे सिरकत कुछ तो मतलब रखती है. देख के मुझ से मुँह यूँ  छुपाना,नज़र मिलाकर,नजर चुराना कुछ तो मतलब  रखती है. तन्हाई के दो पहलू हैं ,खुद ही खुद से बातें दिल की कुछ तो मतलब रखती हैं .  -अंशु चौहान      

'तलाश'

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 उसमें सुलगती हूँ मैं ,मुझमें बुझता है वो . उसमे चलती हूँ मैं ,मुझमें थमता हैं वो  उसमे संवरती हूँ मैं,मुझमे बिखरता है वो  उसमे पहेली हूँ मैं,मुझमे सुलझा है वो    उसमे रोशनी हूँ मैं मुझमे अंधेरा हैं वो.  उसमे तलाश हूँ मैं,मुझमे लापता है वो . उसमे समन्दर हूँ मैं,मुझमे प्यासा हैं वो .     उसमें आशा हूँ मैं, मुझमें निराशा है वो उसमें ठहरी हूँ मैं मुझमें बीता है वो.        -अंशु चौहान    .             

"उम्र का ढलना "

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उम्र का ढलना कोई त्रासदी तो नहीं  जो हर शख्स चिंता जताता है कि उम्र बढ़ रही है  बच्चे से बड़े  होने  का जश्न हो तो , बड़े से बूढ़े होने का कैसा गम  बुढ़ापा तो कितना संपन्न होता है  बचपन ,जवानी के अनुभव लिए  आसक्ति से विरक्ति की ओर , बंधन से मुक्ति की ओर . फिर उसका शोक नहीं जश्न होना चाहिए . जीवन भार नहीं आभार होना चाहिए .  यात्रा का अंतिम चरण प्रथम से अहम् होना चाहिए . मोह रहित ,व्यसन रहित,प्रभु भक्ति में लीन  मगर  मन होना चाहिए.  - अंशु चौहान