मृत्यु -लोक
भयग्रस्त,आक्रांत,कुछ ख़ुश मिज़ाज़ से, कुछ शख़्स हैं आराम से, तो कुछ परेशांन से, हर सूरत लगे सच और स्वप्न भी कभी , अनिश्चय ,असमंजस ,अस्थिरता का ये मृत्यु लोक मुझे अच्छा नहीं लगता। कर्म-फल,पाप-पुण्य का गणितीय लेखा -जोखा , दण्ड ,प्रताड़ना दहशत भरी साँसे, जीवन परीक्षा-स्थल सा, ये मृत्यु लोक मुझे अच्छा नहीं लगता। आवागमन आत्मा का,यूँ देह का आना -जाना किराये का घर सा ये मृत्यु -लोक, मुझे अच्छा नहीं लगता है शरीर रुधिर,अस्थि मज्जा , साँस,प्राण सब उधार के, अपने ही शरीर पर पराया नियंत्रण,कठपुतली सा हाल किए ये मृत्यु लोक मुझे अच्छा नहीं लगता. -अंशु चौहान