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शहीद

सींची हो अपने लहू से जिसने, अमन -चैन की धरती  उस लहू में सोचो असर क्या होगा |  पाषाण सा दर्द भी डगमगा ना सके जिसे  हौसला वो सोचो क्या होगा |   उत्सर्ग पे जिसके खुद  रो  रहा ख़ुदा हो  ए ' पीर' ऐसा, अंतिम सफ़र क्या होगा |  लुटा दी  हो जिसने जिंदगी कौड़ियों  के दाम   क़ीमत वतन के लिए  ऐसी  कोई क्या देगा । फ़र्ज़ की ख़ातिर दी हो जिसने ख़ुशियों को तिलांजलि बलिदानी उससे बड़ा सोचो कोई क्या होगा | देश -हित कर गया जो अलविदा रिश्तों को परमार्थी सोचो कोई उस जैसा  कोई क्या होगा || 
सभी भारत वासियों  से निवेदन है कि डेंगू ,चिकिनगुनिया और मलेरिया से बचने के लिए कृपया घर के साथ-साथ अपने आस -पास की ,अपने शहर की सफ़ाई का विशेष ध्यान रखें । स्वच्छता ही सब बीमारियों से बचने का एकमात्र उपाय है । अपने आस-पास के क्षेत्रों में जहाँ मच्छर हों वहाँ फॉगिंग करवायें । प्राकृतिक औषधियाँ जैसे नीम के पत्ते या  तुलसी के पत्तों का प्रतिदिन सेवन करते रहें । खाने में लोंग व हल्दी का प्रयोग जरूर करें ।  पूजा मे कपूर जलाएं जो मच्छर आदि कीटों को दूर भगाता है । हल्के व्यायाम प्रतिदिन करें । शुद्ध -सात्विक व ताजा खाना खाएं । बाकि सब  ईश्वर के हाथ में  है ।

इट हैप्पेंस ऑनली इन इंडिया

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हमारे इस प्यारे देश में कुछ न कुछ अजीबोग़रीब घटता ही रहता है । सभ्यता -संस्कृति और संस्कारों को महत्व  देने वाले इस देश की कुछ बातें समझ से बिल्कुल परे  हैं जैसे की यहाँ सलवार- कुर्ता ,साड़ी में लिपटी नारियां ही सभ्य मानी  जाती हैं । जीन्स-टी-शर्ट वाली भारतीय परम्परा के ख़िलाफ़ । लेकिन टी-शर्ट पर आपने चुन्नी डाल ली है तो आप सभ्य की श्रेणी में आ सकते हैं । चुन्नी की भारतीय परंपरा में इतनी महत्ता है कि आप नाईट -ड्रेस के पजामा -कुरता पर चुन्नी लगा ले ,शॉर्ट के ऊपर चुन्नी लगा ले तो किसी की मज़ाल आप को असभ्य घोषित कर दे ।  दूसरी विरोधाभाषी चीज़ ये कि यंहा शादी के बाद सलवार कुर्ता पहनने वाली स्त्रियों को भी कुछ घरों में असभ्य माना जाता है । सलवार-कुर्ता पहनने वाली स्त्री को समझा जाता हैं कि वह भारतीय परम्परा के ख़िलाफ़ जा रही है ,और कुछ  ज़्यादा ही आधुनिक बन रही है ।  अरे भई अब इसमें मॉडर्निटी और अपरम्परावादी क्या हो गया ?इस पहनावे में कहाँ शालीनता भंग हो गई । इसमें तो पूरा शरीर ढका हुआ होता है ना और भारतीय परिधान भी है ये ।  मेरी दृष्टि में तो जीन्स मे...
आज हिंदी दिवस पर अपनी इस प्यारी भाषा की तारीफ में मैं भी कुछ कहना चाहती हूँ ,हिंदी एक बहुत ही समृद्ध व भावपूर्ण भाषा है । किसी भी भाषा में इस भाषा के जैसी अभिव्यक्ति  क्षमता नहीं है । इस भाषा का एक शब्द ही तमाम आशयों की पुष्टि कर देता है । आज के दौर में इस भाषा के प्रति लोगों की उपेक्षित सोच बड़ी  ही  चिंता - जनक व आश्चर्य जनक है । इतनी सक्षम व उन्नत भाषा के प्रति लोगो के इस रवैये को हमे बदलना होगा ।हिंदी भाषी होना कभी भी किसी की योग्यता को निम्न स्तरीय नहीं बना सकता । देश में तमाम ऐसे विद्वान लोगों के  उदाहरण हैं  जिन्होंने हिंदी भाषा को अपनाकर देश -दुनिया में अपना विशेष स्थान बनाया है ।  कई लेखक ,संपादक ,पत्रकार गीतकार ऐसे हुए हैं जिनको   हिंदी भाषा ने ही  प्रमुख पहचान दिलायी है । प्रसून जोशी जी (गीतकार )भी ऐसे ही एक शख्सियत हैं । हिंदी भषा को लेकर इनके विचार निश्चित ही सराहनीय हैं ।इनका कहना है कि अंग्रेजी मेरा हुनर है । भाषा तो मेरी हिंदी ही है । भाषा माँ होआज हिंदी दिवस पर अपनी इस प्यारी भाषा की तारीफ में मैं भी कुछ क...
 इंसान के पास दो   तरह की शक्ति होती है- सकारात्मक और नकारात्मक ।ये व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है कि वो किस शक्ति से प्रभावित होता है । एक इंसान को सृजन पसंद होता है और एक को विध्वंश ,एक भाव दुनिया  को  सुन्दर और सुकून भरा बना सकता है और दूसरा विकृत और भयावह । जो लोग सृजनात्मक व सर्वहित की सोच वाली राह चुनते हैं वो वास्तव में आदरणीय व महान होते हैं । ऐसे ही एक उच्च आदर्श वाले शख़्स हुए हैं जम्मू-कश्मीर के  उधमसिंह नगर के नाबील अहमद  वानी ,जो कि बी एस एफ में डी एस पी हैं । आर्थिक स्थिति ठीक न होते हुए भी इन्होंने ग़लत राह नहीं चुनी वरन उसी अभाव को संबल बनाकर अपना ,अपने परिवार का व देश का नाम रोशन किया है । इन्होंने २०१३ में बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स के असिस्टेंट कमांडेंट (वर्क्स )एग्जाम में ऑल इंडिया फर्स्ट रैंक हासिल की है । आज देश को ऐसे ही युवाओं की ज़रूरत है । हमे ऐसे लोगो का ही अनुसरण करना चाहिए जो अभाव में भी किसी गलत राह को नहीं चुनते बल्कि अपनी मेहनत व लगन से अपनी तक़दीर बदलते हैं और देश की उन्नति,विकास और सुरक्षा में अपनी भागेदारी न...