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'बस खाक '(poem)

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चन्द हड्डियाँ,कुछ राख,ना रूत्वा,ना साख  इंसान  का वजूद खाक ,बस खाक  सम्बंध मात्र  मोह बस,प्रीत एक जाल  वीत राग सत्य बस ,ईश्वर अमर नाम . व्यर्थ की ये दौड़ सब ,शून्य सा आधार  ग्यानहीन मानता ,विलासिता महान  रुग्ण सा शरीर- मन,क्षीण आत्म ग्यान  अनासक्त प्रभु से मन ,ना पा सका आत्म भान . छोड़ के चला वो ,छोड़ा जिसके लिए जहान भूला उम्र भर जिसे ,निभा रहा अंत में वो साथ -अंशु चौहान 

"सच तो ये है" (poem)

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भ्रम से यहाँ सभी की ज़िन्दगी छली जाती   बॉडी गार्ड रह जाते हैँ,बॉडी चली जाती हैँ   खुद को बचाने की सब पुरजोर कोशिशें हैँ ना खुदा की रजा हो तो, नाकाम चली जाती हैँ कुछ  फैसले उस पर भी छोड़ दो तो अच्छा  है अपनी मनमानियों में,सफलताएं चली जाती हैँ  क्यों दर्द ही दर्द संभाले रखना इस दिल में  ना सहेजो लबों पर तो ख़ुशियाँ चली जाती हैँ ख़याल  इतना भी करना क्या किसी का  बेखयाली में सारी  रातें चली  जाती  हैं . भूलना है तो खुद को भूल जा इबादत में  खुदा  को  भूलने  से ,शराफतें चली  जाती  हैँ  एक  दिन  मुकर्रर कर  ले आराम  के लिए  इत्मिनान में अवसरों की  संभावनाएँ  चली  जाती  हैँ . मुझसे  पूछ मेरी  खामोशी  का  सबव  बोलता  हूँ  कुछ  भी  तो  दुनिया  रूठ जाती  है . -अंशु चौहान       

'नन्ही सी गुड़िया अब बड़ी हो गई'(poem)

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तस्वीर  -साभार  गूगल  लड़खड़ाती वो जाने कब खड़ी हो गई वो नन्ही सी गुड़िया अब बड़ी हो गई आई जिस पल वो मेरी दुनिया मे खुशी बन के मुबारक वो सबसे घड़ी हो गई. संवार कर मंकां  को उसने घर कर दिया  वो  हुनारवाजों  में  सबसे  बड़ी  हो  गई. मचल  जाती  थी जो छोटी -छोटी  बातों पर  समझदारी की  पक्की  कड़ी  हो  गई  रहता था हर वक्त नाक पे जिसकी गुस्सा  ख़ुशमिज़ाज, अब वही नकचढ़ी हो  गई . समझा बोझ  जिसको पक्षपाती नज़र ने मुद्रिका  वो  नगीना ज़डी हो  गई . चेहरे  की  मुस्कान  बन  गई  वो सभी  की , वो  दिपावली की  फुलझड़ी  हो  गई . -अंशु चौहान 

'शराब "(poem)

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 दो घूंट ज़िन्दगी  की अब शराब  हो  गई  है  नियत आदमी की कितनी खराब  हो गई  है  हैँ हज़ार दलीलें ,बहाने ,बेबसी का  दम  भी  ज़मीर से इच्छाएँ बलवान हो गई हैँ  सुना था रोक लेती हैअपनो की परवाह पीने  से  हकीकत मेँ मगर ये ही,शराबियों का भगवान  हो गई  है  ना प्रेम का असर, ना कोई सीख काम करती  ये जूनून ,महाबली ,गुरु महान  हो  गई  है टूटते  परिवारों का  करूण  रुदन सी ये शौक ,मस्ती ,शक्ति ,शक्तिवान  हो  गई  है  किसी स्त्री की घुटन ,सिसकियाँ,बेचारगी  पुरूष  का ये उस पर अभिशाप हो  गई  है . स्वर्ग का हवाला ,देवताओं की मधुशाला  अधूरे ,असंयमित मनों का, अर्थ हीन गुणगान हो  गई  है . इंसानियत  की  दुश्मन , देह  को  घातक  अर्थव्यवस्था का  खोखला आधार हो गई  है . -Anshu Chauhan

'तेरी मोहब्बत की दुआ मैँ करूँगी'(song)

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तेरी मोहब्बत की  दुआ  मैँ  करूँगी  हरेक पल में  इसको जिया मैं  करूँगी  1.बेसब्र सी निगाहों  को करार आ गया है तुम मिले आरजू में शबाव आ गया है  वफा तेरे  वादों  में अदा मै करूँगी  तेरी मोहब्बत........ 2.तुझसे है ज़िन्दगी ,तुझसे है आशिकी   जीवन में तुझसे ही है ये मौशिकी  हर घड़ी इबादत मेँ सज़दा करूँगी . तेरी मोहब्बत  .. 3.इश्क यूँही  पलता रहे धड़कन  में  तेरी,  खवाहिश  बन  ज़ाऊं मैं ,तेरी  मज़बूरी  हरेक  सांस  तुझपे कुर्वां मैं करूँगी  तेरी  मोहब्बत की  दुआ ................ -अंशु  चौहान

लॉक डाउन (poem)

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थम गई है ज़िंदगी ईश्वर के एक आदेश पे रोक लो अब अधर्म भी ,न चलो ग़लत राह पे राज इस क़दर जो ,अधर्म का था बढ़ गया क्रूर दृष्टि पड़ गई ,ग्रहों की इस भूमि पे। अब न नए ख़्वाब हैं, मन की अंधेरी राह में हर शख्स की आस अब बस ज़िंदगी बचाने मे.| विस्मृत कर अपनी सम्मृद्ध संस्कृति, क्या मिला पाश्चात्य अपनाने में त्याग कर स्वदेशी वस्तु ,जड़ी -बूटियाँ पालते रहे तमाम मर्ज़ और खड़े रहे दवाखाने में है अब भी समय ,सँभल जाओ तुम न हो देर योग,आध्यात्म ,धर्म अपनाने में ना हो धरा का अंत अब, विचार लो ,विश्राम लो दो अनूठा योगदान तुम सृष्टि को  बचाने में | मचे प्रलय इस क़दर ना ,तुम सत्य को ग्रहण करो हो यज्ञ सा पवित्र मन ,सुवास से घिरा रहे हर  निर्भीक हो पर प्रभु से डरा करे।

'महामारी'(corona) ,samajik sandesh

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कोरोना का कहर देखिए , लोग डरे हुए है.हर जगह ,भजन ,कीर्तन और ॐ की ध्वनि सुनाई दे रही हैँ .  काश  इस  वातावरण ,इस  प्राचीन भारतीय आध्यात्मिक  संस्कृति  को  हम  भूले  ना  होते .आज भी य़ग्य,हवन करते  रहे  होते .मंत्रों ,ईश  भक्ति ,और  पवित्र  आचरण  की  महत्ता  को  विस्मृत  ना  किया  होता तो हमारे  चारों  तरफ एक आध्य़ात्मिक  सुरक्षा  चक्र होता ,जिसे भेदने की ताकत किसी वायरस में नहीं होती .कम से कम नियन्त्रण से बाहर  तो  स्थिति नहीं पहुँचती . मगर  बिना  प्रकृति  के प्रकोप के किसी  को  कोई  बात भी  तो  नहीं  समझ  आती ना .तभी  तो  अंत  में  परेशान  होकर  शिव  को  अपना  तीसरा  नेत्र  खोलना  ही  पड़ता  है .भय  दिखाना  ही पड़ता  है अन्यथा पहले  तो  ये  सब  बातें  बकवास , अवैज्ञानिक और  हास्यास्पद...

'मेरे सुझाव '(vichar)

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होली मिलन समारोह,मंदिर निर्माण,जागरण , जन्म दिन ,विवाह वर्ष गांठ ,ऐसे ही किसी अन्य आयोजन आदि मेँ  खर्च हेतु बचाई गई राशि  को आप इस आपात काल मेँ गरीब  व  ज़रूरत मंदों की  सहायता हेतु दान  कर सकते  हैँ.मुख्य मंत्री सहायता  कोष  मेँ दें. आस-पास के क्षेत्र को सैनेटाइज़ करवाने में काम लें.स्प्रे करवाएं... .... सभी का जीवन ,सभी की  सुरक्षा तभी हैँ  हम -तुम, ये जहान ...😷🙏

'संकल्प अधूरे पूरे हों '(poem)

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संकल्प अधूरे पूरे हों ,मैं ऐसा मानस चाहती हूँ हर बार मने नव वर्ष यूँही ,पर नयी सोच भी चाहती हूँ वादों की कच्ची डोर न हो ,नव सृजन रहित कोई भोर ना  हो ऊर्जावान ,सुखद जीवन हेतु मैं ,अथक परिश्रम चाहती हूँ दुःख ,शोक ,काश सब भाव नष्ट हों , आह्लादित मन की कपट रहित ,पावन सी चितवन चाहती हूँ फुटपाथों पर कोई सुबह -शाम न गुज़रे,न हाथ कटोरे खाली हों याचक ना किसी गृह समक्ष खड़ा हो,दाता स्वं प्रभु बलशाली हो नीर बहे जब भी आँखों से ,खुशियों की जल धार बहे निर्वासन हो पाप अधर्म का ,सत्य ,धर्म का ठौर रहे आँखों में सपने बड़े - बड़े हों,पर मन में बचपन बना रहे न बचपन का कोई मोल -भाव हो,निर्भीक मस्ती में उड़ा करे नारी की अस्मत हो सुरक्षित ,साहस में रानी लक्ष्मी बनी रहे नए साल की नई उमंगें ,बस आजीवन  मन में बनी रहें | -अंशु चौहान