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पक्षी सुरक्षा हित में ,एक सोच

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"जान तो जान ही है ना आखिर' ??.. सांभर झील में पक्षियों की मौत के प्रति सभी   की चिन्ता वाजिब है.होनी  भी चाहिए .पक्षियों  की इस तरह अकाल ,दर्दनाक मृत्यु बड़ी ही दुखद घटना है. काश यही पीड़ा हमें उन मुर्गों, बकरों ,..... आदि के लिए भी होती जिनको अपनी  जीभ  के  स्वाद हेतु  ना  जाने  कितनी  बेरहमी  से  एक  झटके  में  खत्म  कर दिया जाता  है .जिनकी तड़प किसी को  महसूस  नहीं होती है ,जिनको बचाने के लिए कोई आवाज नहीं  उठती है  . मुझे तो हर पशु-पक्षी  की अकाल, अप्राकृतिक मृत्त्यु  दुखी  करती  है.आखिर कैसे हम  किसी  एक  पक्षी  या पशु  पर  तो दया , और  अन्य  पर  क्रूरता  दिखा  सकते  हैं .??जीव  तो  सभी  में  एकसा  होता  है .दर्द  भी  सभी  को  समान ...क्या कुछ पक्षियों  व  जानवरों  को अपने  स्वाद  हेतु  बेरहमी  से  मा...

हम उलझ गए बस (poem)

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हम उलझ गए बस मंदिर ,मस्जिद ,गुरुद्वारे में ना राम लड़े ,ना अल्लाह लड़े ,ना नानक  किसी  ज़माने  में . विवाद ,कलह ,द्वेष ,प्रतिशोध  के भाव  भरे बस मानव  में , ईश्वर का कोई राग नहीं है खुद को पूजे  जाने  में . प्रेम ,दया ,सदभाव धरे हैं जिस मन  के शुभ -आँगन में , राम बसे ,अल्लाह बसे ,सर्व- ईश  (एक ईश्वर )बसा उसी हृदयालय में . देश -प्रेम ,सर्व -हित चरम का भाव धरे जो मानव उदार -मन  पावन  में , बिन मस्जिद ,मंदिर ,गुरुद्वारे ,प्रभु  उत्सुक हों ,वहीं  बुलाए  जाने  में . अखंड देश की बात करें  और  सदभाव बहे  हर  धारा  में , रक्त बहा कर  हिंसा से कब  प्रसन्न हुए, ईश्वर पूजे  जाने  से . -अंशु चौहान