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लॉक डाउन (poem)

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थम गई है ज़िंदगी ईश्वर के एक आदेश पे रोक लो अब अधर्म भी ,न चलो ग़लत राह पे राज इस क़दर जो ,अधर्म का था बढ़ गया क्रूर दृष्टि पड़ गई ,ग्रहों की इस भूमि पे। अब न नए ख़्वाब हैं, मन की अंधेरी राह में हर शख्स की आस अब बस ज़िंदगी बचाने मे.| विस्मृत कर अपनी सम्मृद्ध संस्कृति, क्या मिला पाश्चात्य अपनाने में त्याग कर स्वदेशी वस्तु ,जड़ी -बूटियाँ पालते रहे तमाम मर्ज़ और खड़े रहे दवाखाने में है अब भी समय ,सँभल जाओ तुम न हो देर योग,आध्यात्म ,धर्म अपनाने में ना हो धरा का अंत अब, विचार लो ,विश्राम लो दो अनूठा योगदान तुम सृष्टि को  बचाने में | मचे प्रलय इस क़दर ना ,तुम सत्य को ग्रहण करो हो यज्ञ सा पवित्र मन ,सुवास से घिरा रहे हर  निर्भीक हो पर प्रभु से डरा करे।