अंतिम सफ़र
मृत्यु जीवन का अटल सत्य है। ये एक ऐसा विषय है जिस पर ज़िन्दा रहते कोई भी बात करना पसंद नहीं करता है और मृत्यु के बाद कोई भी बात करने लायक रहता नहीं है।मृत्यु के सम्बन्ध में सबसे बड़ी समस्या ये है कि इसका कोई निश्चित समय नहीं है। ये कभी भी,कहीं भी आ सकती है।अन्य सब सामानों की तरह इंसान की एक्सपायरी डेट नहीं होती है.इसी अनिश्चितता की वजह से ही इंसान हर वक़्त एक अनजाने भय से ग्रसित रहता है। ये भय हर व्यक्ति में नहीं होता है लेकिन कुछ जो ज़िंदगी से अत्यधिक मोह ग्रसित रहते हैं और जिन्होंने भविष्य के लिए असीमित योजनाएँ व् तृष्णाएँ पाली होती हैं उनके लिए निश्चित ही आक्रांत करने वाली होती है। वो लोग जो ईश्वर से ज़्यादा नहीं जुड़े हैं उनके लिए ये ज़्यादा ख़तरनाक़ हो सकती है। जो लोग ईश्वर से बहुत ज़्यादा जुड़े हैं,जो प्रभु को ही सच्चा रिश्तेदार मानते हैं उनके लिए तो वो दुनिया भीअपने घर जैसी होने वाली है. इसलिए कुछ के लिए ये जश्न है अपने प्रीतम से मिलने का और कुछ के लिए भयंकर दुःख। ये सच है कि माया से बचना हम सांसारिक ...