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'नूतन वर्ष'

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बीते बरस की बीती बातें,नूतन का अभिनंदन हो , शुभ विचार ,प्रफुल्लित  मन से ,प्रभु चरणों में  वंदन हो . संकल्प नए कुछ, सोच नई हो,बुरी आदतों का मर्दन हो ऊर्ज़ावान हो, मन उल्लासित,हर भाव सुधा हो , चन्दन हो दीन -हीन व्याकुल जन हित ,उदार जनों का संबल हो वैचारिक मतभेद से उपजे, रुग्ण सम्बंध पुनरूर्जित हों  . हो वैभव ,सुख -संपन्न देश , ना कहीं करुण,भयाभय  क्रन्दन  हो . ये नयावर्ष सुमधुर गीत हो ,मन -मयूर नृत्य हित उन्मत हो . -अंशु चौहान

'देश की अखण्डता' (मेरे विचार )

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हमें भारतीय  होने  पर  गर्व  है .मेरा  भारत  महान है . हम अपने  देश  के लिए जान दे देंगे ,भारत  हमारी  आन-बान, शान है आदि ये  सब बातें बोलते तो लगभग हम  सभी  हैँ,  मगर  कोई  मुझे  ये बताए  कि  'भारत'है क्या ? क्या  ये  किसी  ज़मीन के  हिस्से  का  नाम  है ?क्या  किसी  व्यक्ति   विशेष  का  नाम  है ? नहीं  ना ...? हम सभी लोग, चाहे हिन्दू ,मुस्लिम ,सिख ,ईसाई किसी भी धर्म से  हों ,किसी  भी  राज्य  से  हों ,हम सभी जब   एकसाथ हैँ तभी  बनता  है   'भारत' .'भारत'अपने आप में अलग  से  कुछ  नहीं  है . जब  हम  कहते  हैँ  कि  हमारा  देश,  तो  इसका  मतलब  होता  है इस  देश  में  रहने  वाले  सभी  लोग ,चाहे  वो   किसी  भी  जाति ,धर्म  या  संप...

ए पुरूष! (Poem)

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ए पुरूष!  तू  जिससे उत्पन्न हुआ जिसके संरक्षण में रहकर खड़ा हुआ जिसकी लोरी सुनकर बड़ा हुआ जिसके ममत्व भरे स्पर्श से जागृत हुआ जिसका मन  तेरी पीड़ा से द्रवित हुआ जिसकी छाती से लग तू,करुण रुदन से मुक्त हुआ असहाय ,विवश ,वही  दीन -हीन तू ,उस पर अब बल आज़माता है . मत भूल वो जगत जननी है तुझे  जीवन उससे प्राप्त हुआ तू याचक,आश्रित उसके आगे हरदम वो तेरी जीवन दायनी है उसी नारी हित मन में ग़र तेरे सम्मान नहीं तू पतित ,अधर्मी ,दुराचारी , मृत्यु- दण्ड  अधिकारी  है . -अंशु चौहान