संदेश

बुद्धि को सही समय पर सही दिशा दें

चित्र
जिसकी बुद्धि मलिन है, मानसिक स्वास्थ्य खराब है तो वो व्यक्ति कभी भी कुछ अच्छा न तो सोच सकता है और ना ही कुछ अच्छा कर सकता है.उसकी बुद्धि में इतना कुछ गलत भरा होता है कि उसे अच्छा दिखता भी नहीं है, सूझता भी नहीं है. सबसे ख़राब चीज़ ये होती है कि ज्ञान की बातें और अच्छी सलाह तो उसे पचती ही नहीं है . मिथ्या अहंकार,खुद को श्रेष्ठ मानकर वो अपनी अलग ही दुनिया में जीता है।ज़रा ज़रा सी बात पर उसका अहंकार आहत हो जाता है.कुल मिलाकर मानसिक विकार से ग्रसित होने के कारण वो खुद का एक काल्पनिक व्यक्तित्व बना लेता है कि बाकी सब उससे नीचे हैं और वो ही सुपर है। ये गलत फहमी जैसे जैसे बढ़ती है उसकी बददिमागी ज़्यादा से ज़्यादा बढ़ती जाती है और एक दिन वो बड़ा अपराधी बनकर तैयार हो जाता है.उसके चेहरे का तेज खतम हो जाता है .उसके व्यक्तित्व से दूर तक नकारात्मकता छलकने लगती है.वह दिन व दिन अपनी दुर्वृत्तियों के पोषण के लिए सबके साथ अभद्र व्यवहार शुरू कर देता है और ऐसे व्यवहार को जो भी समर्थन करता है कुछ दिन बाद खुद ही उसके बुरे व्यवहार का शिकार हो जाता है . इसलिए कोई गलत है तो सुधार करें, टोकिये.सही चीज सिखाइये....

मनुष्य जन्म का उद्देश्य

चित्र
  एक बात समझ नही आती कि  जब मनुष्य जन्म  का उद्देश्य अच्छे कर्म करके  ईश्वर  प्राप्ति करना ही है तो हम ऐसी चीजों को क्यों प्रमोट कर रहे हैं,ऐसी चीजों में क्यों खुशी ढूंढ रहे हैं जो ईश्वर से दूर ले जा रही हैं . क्लब पार्टी ,दारू पार्टी,डांस बार इन सब की क्यों ज़रूरत है ?क्यों जगह-जगह पवित्र कीर्तन ,भजन और यज्ञ का वातावरण नहीं बना देते ताकि सबकी अशुद्ध बुद्धि शुद्ध हो सके।क्यों स्कूल, कॉलेज में गुरुकुल जैसा माहौल नहीं बना देते? क्यों नैतिक  और आध्यात्मिक उन्नति पर ज़्यादा ज़ोर नही देते? संस्कृति, सभ्यता को नाश करने वाली चीजें भी परोसेंगे फिर अपराध बढ़ेंगे तो कहेंगे कि कलयुग आ गया, लोग बिगड गए.बिल्कुल वैसा ही जैसे कोई खुद ही नदी में डूब जाए और फिर चिल्लाकर कहे कि मुझे बचा लो.है ना कोरी मूर्खता? पहले मानवीयता बचाये तभी मानव सभ्यता बचेगी.हम खुद ही अपराधी तैयार कर रहे हैं फिर उन्हीं से परेशान हो रहे हैं और हम अपराध को मिटाने की इच्छा भी कर रहे हैं।कलयुग भी हम अपने कर्मों से बनाते हैं और सतयुग भी. --- https://youtube.com/@merirachnamereswar?si=eluR-g07t6fgf9g- 👆 ...

गलत सोच और कर्म पर नियंत्रण जरूरी

चित्र
जिंदगी में स्वतंत्रता जितनी जरूरी है उतना ही  नियंत्रण भी है।हर वक्त दी गई स्वतंत्रता घातक सिद्ध हो सकती है.भीतर और बाहर दोनो से नियंत्रण ज़रूरी है . आंत्रिक नियंत्रण (क्रोध ,द्वेष,अधीरता आदि पर) नहीं होगा तो बाहर की प्रतिक्रियाये दुर्घटना व विनाश का कारण बनेंगी. अजकल बढ़ रही सड़क दुर्घटनाएं भी इसी कारण से हो रही हैं कि लोग किसी को भी अपने से आगे निकलते हुए देखकर एकदम बौखला उठते हैं चाहे वो  सड़क पर गाड़ी चलाते हुये किसी का उससे   आगे निकल जाने की सामान्य सी बात क्यों ना हो . आजकल लोगों में अजीब सी अधीरता ,उतावलापन और  कुण्ठा पनप गई है. नैतिक और भावनात्मक  स्तर इतना गिर चुका है कि लोगो को ये ही समझ नही आ रहा कि किस बात पर नाराज होना चाहिये और किस पर नही . ऐसी छोटी छोटी बातों पर लोगो को आवेश में आते देखा है जो वास्तव में बहुत मामूली सी होती हैं. चेतना का गिरा हुआ स्तर ही ये सब करवाता है जब इंसान अपनी 'मै' से बाहर नही आ पाता .मेरा सम्मान ,मेरी पूजा ,सिर्फ मेरा अधिकार ,सब को खुद से नीचे देखने की तमन्ना ,किसी को सुख मे देखने से उत्पन्न दर्द और छटापटाहट...