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'लक्ष्य से भटकाव'

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 इंसान की तीन मूलभूत आवश्यकताएँ हैं रोटी ,कपड़ा और मकान। इन तीनो आवश्यकताओं  का पूरा होना बेशक  बहुत ज़रूरी है लेकिन आधुनिक युग ( कलयुग ) में इंसान ने इसे आवश्यकता नहीं अपने जीवन का मूल लक्ष्य या  उद्देश्य ही बना लिया है।उसके जीने का उद्देश्य अधिक से अधिक पैसा कमाकर अच्छे से अच्छे व्यंजन खाना ,महंगे से  महंगे कपड़े पहनना,बड़े से बड़ा मकान बनाना हो गया है.उनकी सोच  सिर्फ़ स्वादिष्ट व्यंजन ,मदिरा,डांस पार्टी  फैशनेबल ड्रेसेस,महंगी गाड़ी तक सीमित हो चुकी है।  ज़िंदगी का लक्ष्य सिर्फ कैसे भी कर के किसी उच्च पद को हासिल कर लेना और फिर किसी पैसे वाले  परिवार में सुन्दर लड़की या लड़के से शादी करना हो गया है और अंत में फिर अपने मनुष्य जन्म का उद्देश्य समझे  बिना भगवत भाव हीन संतान पैदा कर इस दुनिया से अलविदा कर जाना ।  इनका ये क्रम जाने कितने जन्मों तक चलता रहेगा।भगवान विवश हो कर बार-बार भेजते रहेंगे इस दुनिया में  इन्हें अपने द्वारा निर्धारित परीक्षा में असफल होने की वजह से. लेकिन इनकी बुद्धि में ये स्पष्ट नहीं हो पाएगा कि  आखिर कितने भी म...