मातृ -भाषा
भारत -माँ की बेटी 'हिंदी' पाती दर -दर ठोकर नाज़ों से पलती अंग्रेजी ग़ैर की बेटी होकर आकर्षण में बाँधा ऐसे, निज -भाषा का गौरव हीन किया समृद्ध ,समर्थ' हिंदी 'का पद पल में इसने छीन लिया मातृ -भाषा अपनाने में ना, शर्म देश के लाल करो दो वैभव इस भाषा को तुम गर्व से अपने भाल धरो । भावों की अभिव्यक्ति में' हिंदी' शक्तिशाली भाषा है राज करे हिंदी सदियों तक मन में यही अभिलाषा है भाषायें सभी यूँ तो सम्मान की अधिकारी हैं लेकिन स्व देश में इसकी सर्व -प्रथम बारी है । -अंशु चौहान ( हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में- 2015, मेरी डायरी से )