'स्वरचित कुछ शेर'
मेरे कुछ शेर- सब फूलों में एक सी ख़ुशबू नहीं मिलती कुछ खास बात है आपमें जो औरों में नहीं मिलती || मलबूस ओढ़ा करे इंसानियत का तो क्या नियत तेरे जैसी साफ़ -सुथरी इस जहाँ की नहीं तेरी वफ़ा ,तेरे प्यार की क़ायल हूँ मै सनकी लोग हमे कहें कोई परवाह नही || * गुलशन ए मोहब्बत वीरां था अब तक ए मसीहा मेरे तुम गुल बनके महके हो || * इस जहाँ में तू उस जहाँ में ख़ुदा है दोनों की इवादत से मिली है मोहब्बत कब लगा है तू और ख़ुदा जुदा हैं || * सँभाल के रखती हूँ दिल में तेरी हर बेपरवाही को बेवजहा ही तुम मुझे 'लापरवाह 'नाम देते हो .| * उससे मेरा मिजाज़ अलग था ना मेरी उससे, ना उसकी मुझसे बनी बातें जब भी हुई बस अनबनी,अनबनी सी हुई .| * क्यों बोए रखते हो दिलों में नफरत के बीज अच्छी फसल में क्या खरपतवार अच्छी लगती है | * वो जो तेरी वफ़ा पर हज़ार पहरेदारियाँ रखता है , टूट कर चाहने की एक अदा ही तो है .| * ना कर इतनी मोह...