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पुत्र और पुत्री संग हो समान व्यवहार '

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हम अक्सर हर क्षेत्र में समानता की बात करते  हैँ परंतु हर वक्त एक ग़लती कर बैठते हैँ .हम एक पक्ष विशेष की श्रेष्ठता प्रतिपदित  करने हेतु ,उसके अधिकारों की  रक्षा  हेतु  दूसरे  को हीन और असुरक्षित बना देते हैँ.उदाहरण के लिए हमारे समाज में जब बेटे की स्थिति उच्च थी, तो बेटी  की निम्न थी .उस असमानता से  जब  मन व्यथित हुआ तो हमने बेटियों के हित  हेतु ,उनकी  महत्ता  स्थापित  करने  हेतु  प्रयास  और  प्रचार  करने  शुरू  किए .लडकों की  महत्ता लड़कियों से निम्न  बताने  की  कोशिश  की गई ,विभिन्न विडियो और विज्ञापन  के माध्यम  से .परिणाम स्वरूप  फिर असमानता  पैदा  हो  गई  है .कई जगह लड़कों के साथ लड़कियों की अपेक्षा कम  स्नेह पूर्ण  या अति  पक्षपात पूर्ण  व्यवहार  किया  जा  रहा  है. जब  बात  समानता  की  करनी  है तो व्यवहार  भी  दोनों  के  साथ  समान...