लड्डू गोपाल
कलयुग में 'भक्ति' ही इंसान के उद्धार का एकमात्र साधन है। विशुद्ध (निष्काम )भक्ति से ईश्वर को सहज ही पाया जा सकता है। भक्ति के प्रकार भी अलग-अलग हो सकते हैं और सबके ईष्ट भी अलग -अलग। कुछ शिव जी को मानते हैं ,कुछ राम जी को ,कुछ माँ दुर्गा को, कुछ कृष्णा जी को और कुछ इन सभी को। कृष्ण का स्वरूप चंचल,नटखट ,और सर्वाकर्षक होने के कारण अधिकतर भक्त गण कृष्ण जी के प्रति आकर्षित हो जाते है. कृष्णा जी का बालरूप( लड्डू गोपाल )रूप आज कलयुग में लोगों को अत्यधिक आकर्षित कर रहा है। इसलिए आजकल एक होड़ सी मच गयी है लड्डू गोपाल जी को घर मे लाने की। ईश्वर भक्ति किसी भी रूप में की जाये ग़लत नहीं है लेकिन भक्ति का सम्बन्ध आत्मा से है इसलिए इसमें दिखावा नहीं होना चाहिए।कई लोग आजकल देखा -देखी से या इस भावना से लड्डू गोपाल जी को घर पर लाते हैं कि उनको लाने से उनकी सारी मनोकामनायें पूरी हो जाएंगी, तो ऐसी भावना से नहीं बल्कि सेवा करने की भावना से लाएं। साथ ही उनको उठाकर यहाँ -वहाँ न ले जायें क्योंकि अगर आप बाल रूप में मान रहे हो तो एक छोटे...