संदेश

जून, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

'शराब "(poem)

चित्र
 दो घूंट ज़िन्दगी  की अब शराब  हो  गई  है  नियत आदमी की कितनी खराब  हो गई  है  हैँ हज़ार दलीलें ,बहाने ,बेबसी का  दम  भी  ज़मीर से इच्छाएँ बलवान हो गई हैँ  सुना था रोक लेती हैअपनो की परवाह पीने  से  हकीकत मेँ मगर ये ही,शराबियों का भगवान  हो गई  है  ना प्रेम का असर, ना कोई सीख काम करती  ये जूनून ,महाबली ,गुरु महान  हो  गई  है टूटते  परिवारों का  करूण  रुदन सी ये शौक ,मस्ती ,शक्ति ,शक्तिवान  हो  गई  है  किसी स्त्री की घुटन ,सिसकियाँ,बेचारगी  पुरूष  का ये उस पर अभिशाप हो  गई  है . स्वर्ग का हवाला ,देवताओं की मधुशाला  अधूरे ,असंयमित मनों का, अर्थ हीन गुणगान हो  गई  है . इंसानियत  की  दुश्मन , देह  को  घातक  अर्थव्यवस्था का  खोखला आधार हो गई  है . -Anshu Chauhan