'बढ़ती उम्र का दर्द'
इंसान की असन्तोषी वृत्ति का कुछ नहीं किया जा सकता। बचपन में बड़े होने की इच्छा रखता है और जब बड़ा हो जाता है तो बड़ा कहलाने से परहेज़ करता है। अंकल-आंटी जैसे शब्द तो उसे गाली से लगने लगते हैं। इन शब्दों ने तो इतनी बड़ी समस्या पैदा कर दी है कि कितना भी समझदार व्यक्ति इन्हे सुनकर भड़क उठता है। और बोलने वाले भी कई बार इस बात का ध्यान नहीं रखते की इसे कहाँ प्रयोग करना है.हर व्यक्ति बिना कुछ सोचे समझे इन्हे किसी भी व्यक्ति के लिए प्रयोग में ले लेता है।वह ये दिमाग भी लगाने की कोशिश नहीं करता की ये शब्द अमुक व्यक्ति के लिए सही हैं भी या नहीं.यहाँ बड़े बच्चों द्वारा अपने दोस्त की मम्मी को भी आंटीऔर उनकी सास को भी आंटी कहा जाता है.अब उम्र का इतना बड़ा अंतर और फिर भी सम्बोधन एक जैसा,निश्चित ही ये सोचने का विषय तो है. ये दादियों के लिए तो गर्व की बात हो जाती है मगर बेचारी मम्मियों के लिए थोड़ा शर्मिन्दगी पैदा करने वाली होती है। इस तरह से अंग्रेजी शब्दों की उपस्थित...