उन मुस्कुराहटों पे जब से ग़म के पहरे हुए है ख़ुशियों से मिलने को छटपटाती रोज़ हैं ।
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ज़लज़लों के शहर
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लेखक:
Anshu chauhan
ये ज़लज़लों के शहर हो गए आशियानों पर इनके क़ुदरत के क़हर हो गए मायूसियाँ सी पसरी हैं चेहरों पर महज़ घर ख़ाली हैं और सड़कों पर बसर हो गए तोड़ते हैं दम कहीं साहस ,अरमां ,अठखेलियां संवेदना पर विनाश के गहरे असर हो गए ये ज़लज़लों के शहर हो गए है भूख भी ,प्यास भी और अधूरी आस भी टूट कर ये सभी शोक में बिफ़र रो गए ये ज़लज़लों के शहर हो गए सर्द ,गर्म मौसम कोई छत इसी नभ तले दर्द से बेअसर इनके सबर हो गए ये ज़लज़लों के शहर हो गए
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लेखक:
Anshu chauhan
दिल्ली के दरियागंज इलाके में रविवार की रात बाइक से कार छू जाने की मामूली सी घटना ने जिस तरह भयावह रूप धारण, किया इससे स्पष्ट पता लगाया जा सकता है कि आज कल लोगों में सहनशीलता व मानवीयता की कितनी कमी हो चुकी है । एक भौतिक चीज़ क्या किसी इंसान के लिए इतनी महत्वपूर्ण हो सकती है कि वह उसके लिए किसी व्यक्ति की हत्या कर दे । कोई मानव इतना क्रूर कैसे हो सकता है कि गाड़ी में जरा सी खरोंच आने पर बदले की भावना में वह उस परिवार की समस्त ख़ुशियाँ ही छीनने पर आमादा हो जाये । इतना संकुचित दृष्टिकोण लेकर इंसानियत का अस्तित्व बरक़रार नहीं रखा जा सकता । कोई भी भौतिक चीज़ किसी इंसान के जीवन से अधिक मूल्यवान नहीं हो सकती । अपनी ख़ुशी के लिए किसी दूसरे की ख़ुशी मिटाना इंसानियत पर प्रश्नचिन्ह लगा देता है ।
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लेखक:
Anshu chauhan
स्कूलों में सूर्य पूजा व योग की अनिवार्यता के ख़िलाफ़ उठने वाली आवाजों का कोई तार्किक कारण ही समझ नहीं आ रहा है। कैसी अज़ीब बात है कि लोग भगवान सूर्य देव को भी किसी धर्म विशेष से जोड़कर देख रहें हैं । भगवान सूर्य देव किसी धर्म या व्यक्ति विशेष के संरक्षक नहीं हैं ,वो सभी को समान रौशनी देते हैं । क्या कभी उन्होंने हिन्दू ,मुस्लिम ,सिख,ईसाई या अन्य किसी धर्म को कम या ज्यादा प्रकाश दिया है ? ऐसे ही योग ,यह तो एक प्राकृतिक व्यायाम है । शरीर को स्वस्थ रखने का एक अध्यात्मिक उपाय है इससे किसी का कुछ बुरा नहीं वरन अच्छा ही होगा । कम से कम सूर्य, चन्द्रमा ,तारों और आकाश को तो धर्म की सीमा से मुक्त रखें देशवासियों !जब किसी भी धर्म के व्यक्ति के साथ दुर्घटना होती है और खून की जरूरत होती है तब क्या ब्लड बैंक से ब्लड लेते वक्त बोतल के लेबल पर धर्म विशेष की जाँच करके ही खून लिया जाता है ?।नहीं ! तब तो हमारा उद्देश्य व्यक्ति की जिंदगी को बचाना होता है...
लक्ष्य की प्राप्ति में साधन की पवित्रता का होना बहुत अहम है
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लेखक:
Anshu chauhan
हर इंसान की ज़िन्दगी में कुछ तम्मनायें ,कुछ ख़्वाहिशें होती हैं जिनको पूरा करने के लिए वह हर संभव प्रयास करता है । कुछ लोग अपने लक्ष्य को पाने के लिए उचित व न्यायोचित मार्ग अपनाते हैं जबकि कुछ इसके लिए अपने धर्म ,मर्यादा व मानवीय मूल्यों को दाव पर लगा देते हैं । ऐसे लोगों पर मुझे तरस भी आता है और क्रोध भी। माना के प्रसिद्धि पाना हर इंसान का सपना होता है परन्तु इसके लिए अनुचित साधन अपनाना एकदम ग़लत है । एक ग़रीब व्यक्ति यदि ख़ुद को अमीर बनाने के लिए चोरी ,हत्या आदि घिनौने कृत्य करता है तो वह अपना अगला जन्म भी निष्चित रूप से ख़राब करने जा रहा है । इसके विपरीत यदि वह परिश्रम कर ,ईमानदारी से थोड़ा -थोड़ा अर्जित करके जिंदगी में आगे बढ़ता है तो वह उस अमीर से कई गुना श्रेष्ठ है जो चोरी ,हिंसा आदि का सहारा लेकर एक उच्च पद पर आसीन है । अर्थात लक्ष्य की प्राप्ति में साधन की पवित्रता का होना बहुत अहम है । ऐसे अपराधी तत्त्व जो अपनी ख़ुशियों के लिए किसी का भी अहित ...