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राम और कृष्ण को सही से जाने

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  भगवान राम और कृष्ण जी के (मनुष्य रूप में) जीवन के  विभिन्न दुख भरे प्रसंगों को जो उनके कर्म फल से जोड़ कर देखते हैं वो भूल रहे हैं कि प्रभु राम और कृष्ण सामान्य इंसान नहीं  भगवान हैं और कर्म फल भोगना तो सामान्य इंसान की नियति है.तो भगवान राम और कृष्ण जी के बारे में सही जानकारी प्राप्त करने के लिए रामचरितमानस और श्रीमद्भगवत् गीता को ज़रूर पढ़ना चाहिए,अन्यथा उनके ये विचार प्रभु के प्रति अपराध की श्रेणी में रखे जाएंगे. वास्त्विकता ये है कि सांसारिक  मनुष्यों को सही कर्म सम्बन्धी सही  दिशा निर्देशन देने  हेतु,भगवान  विभिन्न लीलाओं के माध्यम से उन्हे शिक्षित करने की कोशिश करते हैँ. कर्म फल भोगना तो इंसान का काम होता है. कृष्ण तो परम शक्ति हैं, कृष्ण तो  जगन्नाथ अर्थात सम्पूर्ण जगत के नाथ हैं.सृष्टि संचालक हैं ,और सृष्टि संचालक के लिए भी अगर कोई कर्म फल भोगने  जैसे भाव रखकर देखता है तो अल्पज्ञानी है वह व्यक्ति. कृष्ण और राम तो सृष्टि के पालन करता भगवान विष्णु के ही अवतार हैं। व स्वं  सृष्टि के पालन करता हैँ. जय श्री राधे कृष्णा 🙏  ...

'हाय -हाय छोड़ो '

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  हे सभी धार्मिक मनुष्यों !अगर आप अपनी भारतीय संस्कृति में विश्वास करते हो तो अब आप  अंग्रेजी  के 'हाय' शब्द  की जगह नमस्ते, जय श्री कृष्ण ,जय श्री राधे ,जय श्री राम  सम्बोधन का उपयोग करेंगे.वास्तव में कारण  ये  हैं कि  अंग्रेजी  का 'हाय' हिन्दी के 'हाय ' से पूर्णतया भिन्न है.मुझे मालूम है कि 'hi'  की फुल form  के हिसाब से ये शब्द ग़लत नहीं है इसका simple सा अर्थ है 'हाउ आर यू '= 'आप कैसे हैं'.लेकिन हिन्दी का 'हाय'  बहुत ही ग़लत या नेगेटिव शब्द है ज़िसका मतलब 'बद्दुआ' से होता है तो सुबह शाम इस तरह के नकारात्मक शब्द को अपनी ज़ुबान पर लाने से बचें.नमस्ते ,प्रणाम ,जय श्री कृष्णा,जय श्री राधे,जय श्री राम,आदि सम्बोधनों  को अपनायें.इसे पुराने, रूढ़ीवादी ,दकियानूसी विचारों का नाम देकर ये मत भूल जाना कि जीभा पर बार-बार आने वाला ग़लत शब्द कभी ना कभी ग़लत प्रभाव दिखा ही देता है.इसलिए जीभा पर अच्छे शब्द लायें व उन्ही का नित्य प्रयोग करें.एक तरफ जहां विदेशी लोग नमस्ते ,प्रणाम आदि शब्दों को अपनाने में गर्व का अनुभव कर रहे हैं वहीं हम अपन...

कुछ सवाल

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अगर आपके पास हैं उत्तर तो कृपया बताईये- पहला सवाल -  1.मधुमक्खी की उल्टी होते हुए भी शहद इतना पवित्र क्यों माना जाता है कि हर पूजा में ,प्रभु के अभिषेक में इसे प्रयोग में लिया जाता है... ??   दूसरा सवाल -  2.जब मृत्यु के बाद शरीर नष्ट हो जाता है और आत्मा दूसरे शरीर को धारण कर लेती है (सूक्ष्म शरीर 1वर्ष  बाद कर्म फल भोग कर मुक्त हो जाता है) तो  श्राद्ध  कर्म किसके लिए किये जाते हैं. तीसरा सवाल   3.जब मृत्यु के बाद इंसान का पूरा शरीर (मस्तिष्क) सहित नष्ट हो जाता है तो  पुनर्जन्म वाले व्यक्ति को पूर्व जन्म की याद किस माध्यम से रह जाती है. (इसका अर्थ है कि आत्मा ही इंसान की मूल संचालक है मस्तिष्क नहीं.)सभी information आत्मा में ही store होती