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'एक स्त्री  को खूँखार जानवर से इतना डर नहीं होता  जितना कि कुत्सित मानसिकता वाले ,मर्यादा हीन पुरुष से होता है, क्योंकि जानवर से तो सिर्फ़ शरीर को आघात पहुँचता है जबकि इस तरह के इंसान आत्मा व मन तक  को  ज़ख्मी  कर देते हैं।  '
आज दोपहर के समय जब मैने अपने घर का दरवाजा खोला तो वहाँ एक पेपर पड़ा पाया मैने उत्सुकता वश उस पेपर को पूरा पढ़ डाला ,बाद में पता चला कि यह  वही पेपर था जिसको लोग डर के मारे पूरा पढ़ने से डरते हैं । इस पेपर में लिखा था कि इसे पढ़ने वाला इसकी कॉपी २४ जनों में बाँट दे तो उसकी सभी मनोकामना पूरी होगी वरना २४ दिन बाद उसके साथ कुछ अनिष्ट हो सकता है । मै अंधविश्वासी बिलकुल नहीं हूँ क्योंकि मैं ईश्वर में  गहरी आस्था रखती हूँ और  ईश्वर  के अलावा किसी अन्य में विश्वास नहीं करती हूँ । यूँ तो मैं हर चीज़ को तार्किक दृष्टि से सोचती व देखती हूँ परन्तु जँहा बात  ईश्वर व उनके बनाये कुछ  नेक बन्दों की होती है तो पूर्वाग्रही हो जाती हूँ । इस पेपर में ऐसे ही एक नेक बन्दे का जिक्र था जिनके बारे में आप सब ने भी काफी पढ़ा व सुना होगा ये नेक बंदे थे - ॐ बन्ना जी । पाली जिले के  चोटिला गाँव के ये शख़्स बहुत ही नेक इंसान थे । १९८८ में सड़क दुर्घटना में इनकी मृत्यु हो गई थी ,ये तब मात्र  २५ साल के ही थे । कहा जाता है कि उनकी बुलेट मोटर सायकिल...
भारत में' स्वच्छ्ता  अभियान' सफल हो न हो परन्तु' गंदगी फैलाओ 'अभियान बिना किसी प्रयास के अवॉर्ड विनिंग सफलता अर्जित कर सकता है । गंदगी फैलाने में यहाँ के लोग इतने कुशल हैं कि क्या कोई ट्रेनिंग लेकर पारंगत होगा ।चलती  गाड़ी में खिड़की से नीचे, नज़र बचा कर कचरा कैसे फेंका जाता है यहाँ के लोग बख़ूबी जानते हैं ।अगर किसी दिन आपको  सड़क साफ़ दिखाई दे रही है तो कुछ देर में ही सफ़ाई के दुश्मन आयेंगे और कब वहाँ थूक कर ,चॉकलेट व चिप्स के खाली रैपर फ़ेंक कर गंदगी कर जायेंगे आपको पता ही नहीं चलेगा । । थूकने की आदत तो यहाँ  इतनी प्रबल  है कि शायद बिना जुर्माना लगाए व सख़्ती से प्रतिबंधित किए जाने तक इससे छुटकारा पाना असंभव है । हालात उस समय बद्तर हो जाते हैं  जब आप दुपहिया वाहन से कहीं जा रहे हो और पास से गुज़र रही बस या अॉटो वाले का थूक  सीधे आपके ऊपर आकर गिरता है । मुझे समझ में नहीं आता कि ऐसी हरक़त करते वक़्त इनको जरा सा भी ग़लत क्यों नहीं महसूस होता । सड़क पर खड़े होकर नाक साफ़ करना फिर उन्ही गंदे हाथों से कोई भी खाद्य्य ...