'अगर आप अपने शत्रु को क्षमा कर उसे मित्र बनाने की योग्यता रखते हो तो तुमसे बड़ा विजयी व योग्य कोई नहीं है' । - अंशु चौहान
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लेखक:
Anshu chauhan
मुद्दा चाहे जो भी हो नारी की अस्मत हर वक़्त दाव पर लगती है। ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वाले ये पुरुष ,काश !पुरूषत्व शब्द के सही मायने समझ पाते तो हर घर की माँ ,बहन व बेटी आज सुरक्षित व स्वछंद होतीं। अफ़सोस इस बात का है कि इन लोगों में बुद्धि ,विवेक सब होते हुए भी इनकी हरकतें जानवरों जैसी क्यों होती हैं ?क्या इनके माता -पिता इन्हें इतनी भी शिक्षा नहीं देते कि स्त्री को सम्मान देना एक सच्चे और सभ्य पुरुष के लिए कितना ज़रूरी है ?यदि दुनिया में इंसानियत व सभ्यता ज़िंदा रखनी है तो सबसे पहले बच्चों को अच्छे संस्कार व मानवीय मूल्यों को अपनाने की शिक्षा देना बेहद ज़रूरी है क्योंकि ये विषय आत्मा का है जिस पर नियंत्रण संस्कार ही रख सकते है पुलिस या कानून इतना नहीं ।