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नैतिक मूल्य ही अपराध पर अंकुश

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अपराध और अपराधी किसी कोअच्छे नहीं लगते फिर भी अप्रत्यक्ष रूप से सब ख़ुद ही अपने घर में अपराधी तैयार  किये जा रहे हैं। न तो घरों में,न ही शिक्षालयों में इस बात पर ध्यान दिया जाता है कि एक बच्चे को भी अगर तुमने सही दिशा  निर्देशन से भटकने से बचा लिया ,उसे नैतिक मूल्यों का सही ज्ञान दे दिया तो तुम समाज में बढ़ते अपराधियों की  संख्या काफ़ी कम कर सकते हो. देखिये! संस्कृति को बचाने,अपराध के ग्राफ़ को कम करने में घर की और शिक्षण संस्था की  एक  महत्वपूर्ण  भूमिका होती है।घर में माँ -बाप और स्कूल में शिक्षक अगर ये भूमिका अच्छे से निभाएं तो बड़ा  परिवर्तन संभव है लेकिन आजकल न तो घर में माँ-बाप को समय है अपने बच्चों के लिए ,और न ही शिक्षकों  के पास समय है अपने शिष्यों के लिए। दरअसल आजकल सभी की मानसिकता बस पैसा कमाकर अमीर बनने की हो गई है। संस्कार,सभ्यता,नैतिकता तो आउट ऑफ़ स्लेबस हो गए हैं। ये शब्द तो रूढ़िवादी विचारों के द्योतक हो गए हैं, हास्यास्पद हो गए हैं।  इनकी सार्थकता और गहराई तो तब समझ आती है जब स्वं के ही घर का कोई सदस्य किसी अपराधी गतिविधि में ...