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'खलिश'

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 साँसें लूँ तो धुँआं सा उठता है दिल जाने क्यों सुलगा सा अंगार रहता है   बेखयाली सी रहती है निगाहों में अक्सर  नींद ना आए तो आँखों को मलाल रहता है   . हर प्रहर में ज़िक्र उठा लेती हूँ तेरा   भूल जाऊँ तो दिल को आराम रहता है  खाली है वो शहर भी तेरे अहसासों से अब  मेरी यादों में ही बस वो आबाद रहता है इस दर्द की दवा भी बना ना सका कोई  इश्क का मारा  ताउम्र बीमार रहता है . -अंशु चौहान     

'समस्या क्या है '?

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  समस्या क्या है ? समस्या एक  मानसिक  स्थिति ,मन का एक भाव है .वास्तव में किसी भी परस्थिति की गंभीरता,उसकी सहजता ,उसका प्रतिकूल और अनूकूल होने  का निर्धारण हमारा मन,हमारा मस्तिष्क ही तो करता है तभी तो आपने देखा होगा कि एक सी ही प्रस्थिति में दो अलग-अलग व्यक्ति, अलग- अलग व्यवहार करते हैं. उदाहरण के लिए किसी एक परीक्षा में असफल होने वाले दो व्यक्तियों का नज़रिया एकदम विपरीत हो  सकता है.एक के लिए ये बड़ी ही सामान्य घटना हो सकती है जबकि अन्य के लिए असहनीय वेदना देने वाली  हो  सकती  है,ज़िन्दगी  की सभी उम्मीद मिटा  देने वाली  हो  सकती  है. एक और उदाहरण के अनुसार किसी का अपने अजीज़ को खो देना स्वं की भी   ज़िन्दगी का अंत करने को प्रेरित करने वाला हो सकता है  जबकि अन्य के लिए ये जीवन के अंतिम सत्य को क्षणिक दुख व्यक्त कर, संभल जाने जैसा होगा . किसी भी चीज़ को हम जितनी गहराई से महसूस करते हैं उतनी ही वह हमें महसूस होती है. अतः परस्थिति से विचलित  न  होना ,उसमे स्थिर बने रहना हमारे मन,हमारे मानसिक बल पर निर्भर करता...

'कुछ इस तरह'

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वैसेै से तो ग़म और ख़ुशी की हर वक्त कोई वजह ज़रूर होती है लेकिन ख़ुशी बेवजहा भी हो तो उसे संभाल कर रखना चाहिए.सच्चाई तो ये है कि स्वस्थ,सुखी और सफल जीवन के लिए मन से खुश रहना बहुत ज़रूरी है इसलिए जो चीज़  दुखी करें उनसे दूरी और जो ख़ुशी दे उसको अर्ज़ित करने का  प्रयास चाहिए ,वशर्ते वह नैतिक और ज़ायज हो .कुछ ऐसे सोच और फिर  देख-  "कुछ इस तरहा से जी ज़िन्दगी को, कि  हर वक्त जीने की वजहा नई मिले " "कभी  खाली -खाली सा हो दिल तो यूँ नजरिया रहे ,भरने के बाद ही होता है बिखरना भी अक्सर."  "खुद से भी पूछा कर कुछ सवाल कभी -कभी  ज़माने की तोहमतों से ,सिहरता क्यों  है " -अंशु  चौहान