'माता के संस्कार'
हे माताओं, देश के लिए ,हम सब के लिए ,शहीद होने वाले ,बिना किसी रिश्ते के हमारे प्राणों के लिए अपना सीना छलनी करवा लेने वाले, उन तमाम सैनिकों पर रहम खाओ !मत पथ -भ्रष्ट होने दो अपनी संतानों को ,मत आशा रखो उनसे किसी भी अनुचित तरीके से बस अमीर बन जाने की, मत लालसा पैदा करो उनमे किसी का भी अहित करके ,किसी को भी दुख पहुँचाकर स्वं के लिए सुख ,सुविधाएँ अर्जित करने की .उन्हे शिक्षित करो कि तुम्हे कुछ भी अर्जित करना है तो अपनी मेहनत से ,अपनी योग्यता से . उन्हे समझाओ कि गरीबी कोई आनुवांशिक बीमारी नही है .तुम परिश्रम ,ईमानदारी और अपने कर्म मे गहरी निष्ठा रखकर इससे मुक्ति पा सकते हो .अनुचित तरीके से धन ...