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पत्रकारिता 'लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ

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'पत्रकारिता 'लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है जो  कार्यपलिका ,व्यवस्थापिका और  न्यायपालिका  के  बाद  लोकतंत्र  में  महत्वपूर्ण  स्थान रखती  है .लोकतंत्र  को  सुदृढ  और  सशक्त  बनाये  रखने  में  इसकी  महत्वपूर्ण  भूमिका  होती  है . लेकिन  इसके  लिए पत्रकारिता  का  निष्पक्ष ,निडर व  मजबूत  होना  बहुत  ज़रूरी  है तभी  ये अपना  दायित्व  निष्ठा  के  साथ  निभा  पायेगी.   आज  के  परिप्रेक्ष्य में  यदि  देखें  तो एक  स्वतंत्र ,निष्पक्ष व  साहसी पत्रकारिता का  अस्तित्व  खतरे  में  है .पत्रकारों की जगह -जगह हो रही  नृशंस हत्या ,उन पर हो  रहे  आक्रमण व  अपमान जनक व्यवहार से केवल  पत्रकारिता ही  नही संपूर्ण  लोकतंत्र व  समग्र देश  ही खतरे में  है . जब  भी  निष्पक्ष  व  साहसी पत्रकार...

'पोको '(kitten)

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सर्दी के दिन थे.वो अपनी माँ के संग मेरे घर पर आया था .वो इतना छोटा सा और प्यारा था कि कोई भी सरल ह्रदय वाला व्यक्ति उसके मोह-पाश से बच नही सकता था.रंग तो साँवला था मगर आकर्षक बहुत था.उसकी माँ भी सुन्दर और गौर वर्ण की थी.सर्दी के मौसम की वजह से मन चाह रहा था कि उन दोनों के लिए घर में ही रहने की कोई व्यवस्था कर दी जाए मगर फिर इमोशन को कन्ट्रोल करते हुए सोच को व्यवहारिक किया. दरअसल ये माँ और बेटे एक बिल्ली और उसका बच्चा थे.खैर बिना ज्यादा दिमाग लगाए मैने उन दोनों  के लिए खाने -पीने का कुछ इंतजाम किया.उन दोनों के लिए दूध और बिस्किट उपलब्ध कराए गए, पर्याप्त न पड़ने पर चपाती भी बनाई गई . दोनों खा-पीकर बाहर ही खड़े स्कूटर  के कवर में दुबक कर सो गए.सुबह फिर दूध पीकर पता नही कहाँ चले जाते.अब रोज ये ही सिलसिला चलता रहा .बच्चा बड़ा हो रहा था और माँ का उसके  प्रति मोह कम .धीरे -धीरे दोनों में झगड़े शुरू हो गए दूध और इलाके को लेकर शायद.अब माँ चूँकी उसके प्रति क्रूर हो गई थी मैंने भी उसको दूध देना बंद कर दिया था क्योंकि अपनी माँ से डरा,सहमा वह कई बार पेड़ पर चढ़ने का दुस्साहस भी कर चुक...