गज़ल(अब उनकी किसी बात पर रूठना गुनाह हो गया है..)
अब उनकी किसी बात पर रूठना गुनाह हो गया है . वो समझते हैं दिल को पत्थर टूटना गुनाह हो गया है। 1.अब खुद से ही धोखा करेंगे, हम अश्को को रोका करेंगे क्यों बदलता है रुख हर नज़र में अपनी वफ़ा से ये पूछा करेंगे सवाल का जवाब बूझना भी अब तो गुनाह हो गया है 2.कुछ तो है टूटे दिल के भरम में, सांझ ढलती है मन के वहम में, रात में यूं तड़प कर, खुद को तन्हाई में खोजना गुनाह हो गया है . अब उनकी किसी बात पर रूठना गुनाह हो गया है। वो समझते है दिल को पत्थर टूटना गुनाह हो गया है। -