सुंदरता
'सुंदरता 'एक ऐसा तत्व जो सभी को अपनी ओर आकर्षित करता है। सुंदरता की परिभाषा और इसके मापदंड सबके लिए अलग -अलग हो सकते हैं। किसी व्यक्ति की नज़रों में एक व्यक्ति सुन्दर हो सकता है परन्तु दूसरे की नज़र में कोई और। इसलिए सान्सारिक लोगों की सुंदरता के मायने अलग हैं। यहाँ कुछ लोगों की दृष्टि में बहुत गौरा ,लम्बा -चौड़ा (अध्यात्म रहित ,अक्खड़ स्वभाव का व्यक्ति सुन्दर हो सकता है। कुछ लिपि-पुती महिलाएँ सुन्दर हो सकती हैं। कुछ की नज़रों में फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाला ,महंगी पोशाक में लिपटा ,चमकता हुआ (क्रीम से पुता )व्यक्ति सुन्दर हो सकता है। लेकिन मेरी नज़रों में या यूँ कहें सुंदरता के वास्तविक नज़रिये से एक किसी कुटिया में रह रहा ,पवित्र आचरण वाला ,साधारण से लिबास में लिपटा ,आध्यात्मिक आभा से युक्त व्यक्ति सर्वाधिक आकर्षक व सुन्दर है। आचरण की पवित्रता ,अध्यात्म की चमक ही व्यक्ति की वास्तविक सुंदरता होती है मगर इसे महसूस करने के लिए आँखों में वही पवित्रता होना भी ज़रूरी है। इस भौतिक जगत के लोग चाहे कितने सौंदर्य प्रसाधन अपना लें ,चाहे कितनी नयी वेश-भूषायें आजमा ले...