'दुविधा' .
बड़ी दुविधा सी रहती है हर वक्त ,ये निर्णय नहीं ले पाती कि सांसारिक जीवन की सफलता को उद्देश्य रखूँ या आध्यत्मिक .सुनती और पढ़ती तो यही आई हूँ अक्सर कि मनुष्य जन्म बड़ी मुश्किल से मिलता है,इसे ईश्वर प्राप्ति में लगाना चाहिए . किसी से मोह नहीं रखना चाहिए .लेकिन सांसारिकता के लिए मोह मुझे लगता है थोड़ा तो ज़रूरी है .किसी भी क्षेत्र में सफल होने के लिए उसके प्रति मोह की ज़रूरत तो रहेगी ही .मोह के वशिभूत होकर ही हर व्यक्ति रिश्ते निभा रहा है .हर कर्म कर रहा है.जिस दिन निर्लिप्त भाव से कोई ये कर्म और दायित्व निभाएगा उसी दिन से वह योगी और आध्यत्मिक कहलाएगा .सफलता ,नाम,शोहरत इन सब चीजों के प्रति मोह ,ये ही तो सांसारिकता के लक्षण हैँ .इंसान जब हर तरह का मोह ,इच्छाएँ त्याग देता है तभी अध्यात्म से और ईश्वर स...