'अहिंसा और शाकाहार'
अहिंसा को किसी धर्म विशेष से जोड़कर नही देखना चाहिए .अहिंसा का सम्बन्ध तो आत्मा से है .वो हर व्यक्ति जो भावुक है ,जीवों के प्रति दया -भाव रखता है ,उनसे प्रेम करता है , कभी हिंसक या मांसाहारी नही हो सकता .आखिर कैसे कोई एक मासूम ,निर्दोष ,असहाय जीव को स्वं के लिए मार -काट सकता है ,उसके मृत शरीर मे मिर्च -मसाले डालकर उसमे स्वाद ढूंढ सकता है .रास्ते मे पड़े मृत जानवर को,या किसी भी मृत जानवर की देह को देखकर हमारे अंदर घृणा और दया के भाव उत्पन्न होते हैँ फिर इसमे हम स्वाद कैसे खोज लेते हैँ.कितनी विचित्र बात है कि पहले तो हम एक निर्दोष जानवर को क्रूरता से मार डालें और फिर उस मृत जीव को अपने पेट मे ग्रहण कर लें.क्या हमारा पेट शमशा...