'परवरिश'
मां -बाप के लिये बच्चों की परवरिश एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है लेकिन आज कल लोग इसे बहुत हल्के में लेते हैं। माँ-बाप की इस लापरवाही वृत्ति से ही अक्सर उनके बच्चे पथभ्रष्ट हो जाते हैं .उनका आचरण बिगड़ जाता है.वो मनमानी करने लगते हैं.सही ग़लत की समझ न होने से कुछ भी ग़लत करने से नहीं डरते हैं. कई बार तो माँ बाप खुद ही इतने विवेकशून्य होते हैं कि वो बच्चों को सही और ग़लत का फर्क ही नहीं समझा पाते हैं क्योंकि उन्हे खुद ही नैतिकता का ग्यान नहीं होता है या आधुनिक या दबंग बनाने की होड़ में वो अपनी संतान को एकदम संस्कारहीन या बेहुदा बना डालते हैं. उनकी ये लापरवाही बाद में उनके लिये तो हानिकारक सिद्ध होती ही है साथ ही पूरे समाज के लिए भी घातक हो जाती है.समाज में मूर्ख और अपराधी वर्ग ऐसे ही लोग तैयार कर देते हैं जो बच्चों की सही परवरिश नहीं करते. बच्चों को डॉक्टर ,इंजीनियर बना देना इतनी बड़ी बात नहीं होती जितना कि उन्हे संस्कारवान और मर्यादित आचरण वाला बनाना.अच्छे संस्कार नहीं दिये जायें तो पीढ़ी दर पीढ़ी बेकार फसल ही तैयार होती है.कुंठाग्रस्त,बिगढ़ैल मानसिकता का व्यक्त...