'माता के संस्कार'
हे माताओं,
देश के लिए ,हम सब के लिए ,शहीद होने वाले ,बिना किसी रिश्ते के हमारे प्राणों के लिए अपना सीना छलनी करवा लेने वाले, उन तमाम सैनिकों पर रहम खाओ !मत पथ -भ्रष्ट होने दो अपनी संतानों को ,मत आशा रखो उनसे किसी भी अनुचित तरीके से बस अमीर बन जाने की, मत लालसा पैदा करो उनमे किसी का भी अहित करके ,किसी को भी दुख पहुँचाकर स्वं के लिए सुख ,सुविधाएँ अर्जित करने की .उन्हे शिक्षित करो कि तुम्हे कुछ भी अर्जित करना है तो अपनी मेहनत से ,अपनी योग्यता से . उन्हे समझाओ कि गरीबी कोई आनुवांशिक बीमारी नही है .तुम परिश्रम ,ईमानदारी और अपने कर्म मे गहरी निष्ठा रखकर इससे मुक्ति पा सकते हो .अनुचित तरीके से धन कमा भी लिया तो आत्मा और परमात्मा दोनों ही धिक्कारेंगे .अपराध करके कोई भी इंसान चैन की नींद नही सो सकता है .याद रहे कोई भी " इंसान"!
एक मोची ,झाड़ू पोछे वाला ,गाड़ी सफाई वाला या इसी तरह की श्रेणी वाले ये लोग सच मुच सम्मानीय हैं,ये लोग कार्य करके अपनी आजीविका कमाते हैं ? क्योंकि इनकी अच्छाई ,इनकी ईमानदारी ,इनका संतोष इन्हे ग़लत तरीके से धन कमाने के लिए प्रतिबंधित करता है .इनमे व्यर्थ की तृष्णा ,भटकाव ,लालच और क्रूरता नही है .जब कोई भी व्यक्ति अनुचित तरीके से धन कमाने की सोचता है तो क्रूर ,स्वार्थी ,भ्रष्ट और लालची हो जाता हैँ फिर कोई भी ग़लत कर्म जैसे - हत्या ,चोरी ,शोषण ,धोखा ,मिलावट ,घूसखोरी ,अपहरण आदि करते हुए उसे बुरा नही महसूस होता है. इसलिए किसी भी ग़लत राह पर चलने से पूर्व ही उसे रोक लें अन्यथा उसे एक अपराधी बनने में देर नही लगेगी .
देश के लिए अपना अमन ,चैन ,खुशियाँ ,सारे रिश्ते -नाते ,सारी सौगाते लुटा देने वाले उन स्वार्थ रहित ,वीर जवानों के प्राण यूँ मत जाने दो .अपनी संतानों को स्वार्थी ,लालची और क्रूर मत बनाओ .उन्हे ऐसा बनाओ कि आपकी संतानों की तारीफ हो तो कोई आपकी कोख की तारीफ करना न भूले .तो उठो , जागो .और अपनी संतानों के मन -मस्तिष्क में भर दो देश भक्ति ,कर्त्तव्य निष्ठा ,ईमानदारी ताकि भले ही वो सैनिक ना भी बने मगर देश के साथ गद्दारी और विश्वास घात करने की तो कम से कम ना सोच सकें .रोक लो ये आतंक ,ये नरसंहार ,ये निर्मम हत्याएँ !
(आतंकवाद के संदर्भ ..)
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