संदेश

उन मुस्कुराहटों पे जब से ग़म के  पहरे हुए है ख़ुशियों  से मिलने को छटपटाती रोज़ हैं ।
ना रक्खो दिलों में गिले-शिक़वे कोई अब ज़िंदगी में दोस्ती के पल मुश्किल से मिलते हैं । 
हर शख़्स कला का कद्रदान नहीं होता कुछ यूँही हर हुनर का सबब पूछते हैं ।