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'शराब "(poem)

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 दो घूंट ज़िन्दगी  की अब शराब  हो  गई  है  नियत आदमी की कितनी खराब  हो गई  है  हैँ हज़ार दलीलें ,बहाने ,बेबसी का  दम  भी  ज़मीर से इच्छाएँ बलवान हो गई हैँ  सुना था रोक लेती हैअपनो की परवाह पीने  से  हकीकत मेँ मगर ये ही,शराबियों का भगवान  हो गई  है  ना प्रेम का असर, ना कोई सीख काम करती  ये जूनून ,महाबली ,गुरु महान  हो  गई  है टूटते  परिवारों का  करूण  रुदन सी ये शौक ,मस्ती ,शक्ति ,शक्तिवान  हो  गई  है  किसी स्त्री की घुटन ,सिसकियाँ,बेचारगी  पुरूष  का ये उस पर अभिशाप हो  गई  है . स्वर्ग का हवाला ,देवताओं की मधुशाला  अधूरे ,असंयमित मनों का, अर्थ हीन गुणगान हो  गई  है . इंसानियत  की  दुश्मन , देह  को  घातक  अर्थव्यवस्था का  खोखला आधार हो गई  है . -Anshu Chauhan

'तेरी मोहब्बत की दुआ मैँ करूँगी'(song)

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तेरी मोहब्बत की  दुआ  मैँ  करूँगी  हरेक पल में  इसको जिया मैं  करूँगी  1.बेसब्र सी निगाहों  को करार आ गया है तुम मिले आरजू में शबाव आ गया है  वफा तेरे  वादों  में अदा मै करूँगी  तेरी मोहब्बत........ 2.तुझसे है ज़िन्दगी ,तुझसे है आशिकी   जीवन में तुझसे ही है ये मौशिकी  हर घड़ी इबादत मेँ सज़दा करूँगी . तेरी मोहब्बत  .. 3.इश्क यूँही  पलता रहे धड़कन  में  तेरी,  खवाहिश  बन  ज़ाऊं मैं ,तेरी  मज़बूरी  हरेक  सांस  तुझपे कुर्वां मैं करूँगी  तेरी  मोहब्बत की  दुआ ................ -अंशु  चौहान

लॉक डाउन (poem)

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थम गई है ज़िंदगी ईश्वर के एक आदेश पे रोक लो अब अधर्म भी ,न चलो ग़लत राह पे राज इस क़दर जो ,अधर्म का था बढ़ गया क्रूर दृष्टि पड़ गई ,ग्रहों की इस भूमि पे। अब न नए ख़्वाब हैं, मन की अंधेरी राह में हर शख्स की आस अब बस ज़िंदगी बचाने मे.| विस्मृत कर अपनी सम्मृद्ध संस्कृति, क्या मिला पाश्चात्य अपनाने में त्याग कर स्वदेशी वस्तु ,जड़ी -बूटियाँ पालते रहे तमाम मर्ज़ और खड़े रहे दवाखाने में है अब भी समय ,सँभल जाओ तुम न हो देर योग,आध्यात्म ,धर्म अपनाने में ना हो धरा का अंत अब, विचार लो ,विश्राम लो दो अनूठा योगदान तुम सृष्टि को  बचाने में | मचे प्रलय इस क़दर ना ,तुम सत्य को ग्रहण करो हो यज्ञ सा पवित्र मन ,सुवास से घिरा रहे हर  निर्भीक हो पर प्रभु से डरा करे।