गलत सोच और कर्म पर नियंत्रण जरूरी




जिंदगी में स्वतंत्रता जितनी जरूरी है उतना ही  नियंत्रण भी है।हर वक्त दी गई स्वतंत्रता घातक सिद्ध हो सकती है.भीतर और बाहर दोनो से नियंत्रण ज़रूरी है .

आंत्रिक नियंत्रण (क्रोध ,द्वेष,अधीरता आदि पर) नहीं होगा तो बाहर की प्रतिक्रियाये दुर्घटना व विनाश का कारण बनेंगी.

अजकल बढ़ रही सड़क दुर्घटनाएं भी इसी कारण से हो रही हैं कि लोग किसी को भी अपने से आगे निकलते हुए देखकर एकदम बौखला उठते हैं चाहे वो  सड़क पर गाड़ी चलाते हुये किसी का उससे   आगे निकल जाने की सामान्य सी बात क्यों ना हो .
आजकल लोगों में अजीब सी अधीरता ,उतावलापन और  कुण्ठा पनप गई है.
नैतिक और भावनात्मक  स्तर इतना गिर चुका है कि लोगो को ये ही समझ नही आ रहा कि किस बात पर नाराज होना चाहिये और किस पर नही .
ऐसी छोटी छोटी बातों पर लोगो को आवेश में आते देखा है जो वास्तव में बहुत मामूली सी होती हैं.
चेतना का गिरा हुआ स्तर ही ये सब करवाता है जब इंसान अपनी 'मै' से बाहर नही आ पाता .मेरा सम्मान ,मेरी पूजा ,सिर्फ मेरा अधिकार ,सब को खुद से नीचे देखने की तमन्ना ,किसी को सुख मे देखने से उत्पन्न दर्द और छटापटाहट  वाली वृत्ति तो ये लोग ही अक्सर ऐसी परस्थिति पैदा कर देते हैं कि शांत और सुलझे हुये दिमाग के लोगो की ज़िन्दगी  मुश्किल हो जाती है .
पर ईश्वर पर भरोसा रखने वाले लोग ईश्वर की छत्र छाया  मे सुरक्षित रह ही लेते हैं. और देर -सवेर ही सही बुरी सोच वाले लोगो को अपने गलत कर्मों का अहसास और सज़ा ज़रूर मिलती है .इसलिए प्रभु की बनाई इस सुन्दर सृष्टि को अपनी गलत हरकतों ,अपनी गलत सोच से दूषित ना करें .इसकी खूबसूरती को महसूस करने और बनाये रखने के लिये अपनी सोच  और कर्म को खूबसूरत बनाये रखें .

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