दिल में किसी को कैद करो तो जाने न दो
सहेज कर इस कदर रखो के छटपटाने न दो
आदत सी हो जाए इस कैदख़ाने की
आशियां  कहीं और बनाने न दो
ये सवाल मोहब्बत का है फिर भी
बंदिश की घुटन खयालातों  में आने न दो
पा ही लीं हैं जो  घड़ियाँ  उसे आजमाने की
आवारा  पंछी की तरह उसे  उड़ जाने न दो । 


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