दिल में किसी को कैद करो तो जाने न दो
सहेज कर इस कदर रखो के छटपटाने न दो
आदत सी हो जाए इस कैदख़ाने की
आशियां कहीं और बनाने न दो
ये सवाल मोहब्बत का है फिर भी
बंदिश की घुटन खयालातों में आने न दो
पा ही लीं हैं जो घड़ियाँ उसे आजमाने की
आवारा पंछी की तरह उसे उड़ जाने न दो ।
सहेज कर इस कदर रखो के छटपटाने न दो
आदत सी हो जाए इस कैदख़ाने की
आशियां कहीं और बनाने न दो
ये सवाल मोहब्बत का है फिर भी
बंदिश की घुटन खयालातों में आने न दो
पा ही लीं हैं जो घड़ियाँ उसे आजमाने की
आवारा पंछी की तरह उसे उड़ जाने न दो ।
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