पत्रकारिता 'लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ






'पत्रकारिता 'लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है जो  कार्यपलिका ,व्यवस्थापिका और  न्यायपालिका  के  बाद  लोकतंत्र  में  महत्वपूर्ण  स्थान रखती  है .लोकतंत्र  को  सुदृढ  और  सशक्त  बनाये  रखने  में  इसकी  महत्वपूर्ण  भूमिका  होती  है . लेकिन  इसके  लिए पत्रकारिता  का  निष्पक्ष ,निडर व  मजबूत  होना  बहुत  ज़रूरी  है तभी  ये अपना  दायित्व  निष्ठा  के  साथ  निभा  पायेगी.  

आज  के  परिप्रेक्ष्य में  यदि  देखें  तो एक  स्वतंत्र ,निष्पक्ष व  साहसी पत्रकारिता का  अस्तित्व  खतरे  में  है .पत्रकारों की जगह -जगह हो रही  नृशंस हत्या ,उन पर हो  रहे  आक्रमण व  अपमान जनक व्यवहार से केवल  पत्रकारिता ही  नही संपूर्ण  लोकतंत्र व  समग्र देश  ही खतरे में  है .
जब  भी  निष्पक्ष  व  साहसी पत्रकार  ने कोई  सुधारात्मक पहल  करने  की कोशिश की,कोई  समाजिक  विसंगति या भ्रष्टाचार का  पर्दाफाश करने  की कोशिश की  है तब -तब  उसे इसकी भारी कीमत चुकानी  पड़ी. इस  देश  में व  अन्य  कई  देशों में  हत्याएं  होती  रही हैं.आज  कोई  भी  पत्रकार  जो  देश  में व्याप्त  किसी  भी  अव्यवस्था के खिलाफ कुछ  बोलता है  या  लिखता  है सुरक्षित  नही  है.इसी वजह से कई ऐसी आवाजें  दबी  हुई  हैं ज़िन्हे  बुलंद  होना चाहिए .कई  ऐसी  सच्चाईयां  छुपी  हुई हैँ  ज़िन्हे  उजागर  होना  चाहिए .

एक  निष्पक्ष ,साहसी और  सुरक्षित पत्रकारिता  लोकतंत्र  को  सही  मायने प्रदान  कर  सकती  है .देश  की  बिगड़ी हालत  सुधार  सकती  है .इसके  लिए ज़रूरी  है कि  पत्रकारों  की  सुरक्षा व स्वतंत्रता  पर  विशेष  ध्यान  दिया  जाए .

पत्रकारिता  को  और  अधिक  मजबूत बनाने  के  लिए  ज़रुरी  है  कि  हर कदम  पर  उनकी  सुरक्षा  के  पुख्ता  इन्तजाम  किए  जाएं .उनकी विचार  अभिव्यक्ति  व  लेखन  की  स्वतंत्रता  अनावश्यक  रुप  से  प्रतिबंधित  न  की  जाए .

देश  में  निर्भीक,निष्पक्ष  पत्रकार जो   देश  हित  हेतु  अपने  प्राणों  की  अहुति देते  हैँ .जो  सच  के  लिए  गुमनाम  मौत मर  जाते  हैं  उन्हे  शहीदों  जैसा ही   सम्मान  मिलना  चाहिए .उनके  परिवार वालों  को  मुआवजा  राशि  और वो  सारे अधिकार  और  सम्मान  मिलने  चाहिएँ जो  सैनिकों  के  परिवार वालों  को मिलते  हैं. रिपोर्टिंग  के दौरान या किसी उच्च अधिकारी और  किसी  सेलेब्रिटी से इंटरव्यु  के दौरान  पत्रकारों  के  साथ किसी  भी  तरह  का  अभद्र व्यवहार दण्डनीय अपराध  की  श्रेणि  में  रखा जाना  चाहिए .चूँकी  एक  पत्रकार  भी तो आखिर  कलम का  सिपाही  ही  तो  कहलाता  है इसलिये  वह  भी देश  के सीमा प्रहरियों  जैसे  सम्मान  का अधिकारी  है.

-अंशु  चौहान

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