'गणित तुम भूत से '
तुमसे जितना दूर मै भागी
उतना ही तुम पीछे आए
बचपन पर तुमने मेरे
कैसे -कैसे प्रतिबन्ध लगाए
जीना इतना किया है दूभर
बिन तेरे ना कोई काम सध पाए
क़दम -क़दम पर देता दस्तक
पीछा कोई कैसे छुड़ाए
विद्यालय में तुझसे जूझे
ट्यूशन में फिर से मिल जाए
एक मिनिट को चैन ना पाते
मौज़ -मस्ती पर रोक लगाए
परीक्षा में दिल की धड़कन को
बेरहमी से तू ही बढ़ाए
कपड़ों का बाज़ार या सब्ज़ी -मण्डी
कहाँ -कहाँ तुझसे नज़र बचाएँ
भूत-प्रेत सा मुझे लगे ये
जितना देखूँ जी घबराए
है क्या कोई पंडित ,ओझा
डर गणित का जो दूर भगाए |
-अंशु चौहान

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