"सच तो ये है" (poem)
बॉडी गार्ड रह जाते हैँ,बॉडी चली जाती हैँ
खुद को बचाने की सब पुरजोर कोशिशें हैँ
ना खुदा की रजा हो तो, नाकाम चली जाती हैँ
कुछ फैसले उस पर भी छोड़ दो तो अच्छा है
अपनी मनमानियों में,सफलताएं चली जाती हैँ
क्यों दर्द ही दर्द संभाले रखना इस दिल में
ना सहेजो लबों पर तो ख़ुशियाँ चली जाती हैँ
ख़याल इतना भी करना क्या किसी का
बेखयाली में सारी रातें चली जाती हैं .
भूलना है तो खुद को भूल जा इबादत में
खुदा को भूलने से ,शराफतें चली जाती हैँ
एक दिन मुकर्रर कर ले आराम के लिए
इत्मिनान में अवसरों की संभावनाएँ चली जाती हैँ .
मुझसे पूछ मेरी खामोशी का सबव
बोलता हूँ कुछ भी तो दुनिया रूठ जाती है .
-अंशु चौहान

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