'कुछ इस तरह'


वैसेै से तो ग़म और ख़ुशी की हर वक्त कोई वजह ज़रूर होती है लेकिन ख़ुशी बेवजहा भी हो तो उसे संभाल कर रखना चाहिए.सच्चाई तो ये है कि स्वस्थ,सुखी और सफल जीवन के लिए मन से खुश रहना बहुत ज़रूरी है इसलिए जो चीज़  दुखी करें उनसे दूरी और जो ख़ुशी दे उसको अर्ज़ित करने का  प्रयास चाहिए ,वशर्ते वह नैतिक और ज़ायज हो .कुछ ऐसे सोच और फिर  देख- 


"कुछ इस तरहा से जी ज़िन्दगी को, कि 

हर वक्त जीने की वजहा नई मिले "


"कभी  खाली -खाली सा हो दिल तो यूँ नजरिया रहे ,भरने के बाद ही होता है बिखरना भी अक्सर." 



"खुद से भी पूछा कर कुछ सवाल कभी -कभी 

ज़माने की तोहमतों से ,सिहरता क्यों  है "


-अंशु  चौहान 


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