तेरी चाहत का धीमा ज़हर ,मेरी सांसो में घुल रहा कब से संभाले थे ये तबियत आज कमबख्त हर राज खुल रहा ।
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हे राम कुछ ऐसा कर दो
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लेखक:
Anshu chauhan
हे राम !आचरण इस युग के नर का, भी मर्यादित कर दो लक्ष्मण रेखा जिसका हो न उल्लंघन, नारी- हित निर्धारित कर दो । कब तक देखूं पतित आचरण ,नारी की ये निंदा दो आवरण शील,दया का हे कृपालु भगवंता । भेद सके ना पुरुष जिसे वो रक्षा कवच बना दो , हर नारी में शुद्ध चरित्र की निर्मल चेष्टाजगा दो । निष्फल कर दे हर कुत्सित दृष्टि को ऐसा आत्म नियंत्रण भर दो , हर पुरुष को राम ,हर नारी को सीता कर दो पैदा ना हो कोई रावन फिर से इस कलियुग को सतयुग कर दो ।