संदेश

मेरे खयालातों से उसके ख़यालात नहीं मिलते वो जिद पर अड़ा है  के तुम मेरा अक्स  हो ।   
वो हमारी जुस्तजू  में ख़ुद को मिटाने पर आमादा हैं  मग़र मगरूर इतने हैं के इज़हारे मोहब्बत नहीं करते  

माँ तू दु आ सी लगती है

चित्र
माँ! तू  बीमारी में दवा लगती है मुश्किल  में दुआ लगती है  दिल को कोई गम नहीं छूता जब तू करीब हुआ करती है  सिर पर तेरा हाथ रब का  सा सुकूं देता है उस  वक्त बहुत डरती हूँ जब तू दूर हुआ करती है तेरे आंचल की छाया में दर्द  पिघल  सा  जाता  है शक्ति सी हो जाती हूँ  जब तू सिर को छुआ करती है । रचनाकार -अंशु चौहान तस्वीरसाभार -गूगल