संदेश

'हौसलों के दरख़्त'

उससे  फ़ासले जो कम नहीं होते ,दिल  से काफ़ूर ये ग़म नहीं होते ये ज़िंदगी ख़ुदा की इनायत है साहिब ,हार कर हालात से यूं क़ाबिल नहीं रोते उन सूखे दरख़्तों में अभी बाक़ी  है हौसला  ,तूफ़ानों में अब भी धूमिल नहीं होते एक इबारत वो ज़हन में रखता है अक्सर ,अर्श से गिर कभी तारे नहीं रोते वो गुज़रा था जिन राहों से कभी,कहते हैं वहाँ अब अँधेरे नही होते ।।
दिल में किसी को कैद करो तो जाने न दो सहेज कर इस कदर रखो के छटपटाने न दो आदत सी हो जाए इस कैदख़ाने की आशियां  कहीं और बनाने न दो ये सवाल मोहब्बत का है फिर भी बंदिश की घुटन खयालातों  में आने न दो पा ही लीं हैं जो  घड़ियाँ  उसे आजमाने की आवारा  पंछी की तरह उसे  उड़ जाने न दो । 
ये' ख़ुशी 'एक इवादत है इसकी पूजा किया  करें  ये एक 'प्रसाद'' है ख़ुदा का जो सब को  दिया  करें ।