संदेश

आलोचनाओं और गालियों के प्रभाव से यदि आप बचना चाहते हैं तो इन्हें स्वीकार करना बंद कर दें ,क्योंकि हम किसी चीज़ से प्रभावित तभी होते हैं जब हम उसे स्वीकार(  एक्सेप्ट ) कर लेते हैं । आप किसी गाली को स्वीकार तभी कर सकते हैं जब आप स्वयं को उसके लायक मान लेते हैं । 
एक आलोचक जब किसी की आलोचना करने पर उतारू  होता है तो इतनी तल्लीनता से करता है कि गैस पर रखा दूध कब मावे में तब्दील हो जाता है, उसे खबर ही नहीं लगती । 
हमे अपने सिद्धांत किसी डर या दूसरे के निर्णय से बदलने नहीं चाहिए ,हम मे  सही को सही व गलत को ग़लत कहने की   शक्ति होनी चाहिए ।