संदेश

"सच तो ये है" (poem)

चित्र
भ्रम से यहाँ सभी की ज़िन्दगी छली जाती   बॉडी गार्ड रह जाते हैँ,बॉडी चली जाती हैँ   खुद को बचाने की सब पुरजोर कोशिशें हैँ ना खुदा की रजा हो तो, नाकाम चली जाती हैँ कुछ  फैसले उस पर भी छोड़ दो तो अच्छा  है अपनी मनमानियों में,सफलताएं चली जाती हैँ  क्यों दर्द ही दर्द संभाले रखना इस दिल में  ना सहेजो लबों पर तो ख़ुशियाँ चली जाती हैँ ख़याल  इतना भी करना क्या किसी का  बेखयाली में सारी  रातें चली  जाती  हैं . भूलना है तो खुद को भूल जा इबादत में  खुदा  को  भूलने  से ,शराफतें चली  जाती  हैँ  एक  दिन  मुकर्रर कर  ले आराम  के लिए  इत्मिनान में अवसरों की  संभावनाएँ  चली  जाती  हैँ . मुझसे  पूछ मेरी  खामोशी  का  सबव  बोलता  हूँ  कुछ  भी  तो  दुनिया  रूठ जाती  है . -अंशु चौहान       

'नन्ही सी गुड़िया अब बड़ी हो गई'(poem)

चित्र
तस्वीर  -साभार  गूगल  लड़खड़ाती वो जाने कब खड़ी हो गई वो नन्ही सी गुड़िया अब बड़ी हो गई आई जिस पल वो मेरी दुनिया मे खुशी बन के मुबारक वो सबसे घड़ी हो गई. संवार कर मंकां  को उसने घर कर दिया  वो  हुनारवाजों  में  सबसे  बड़ी  हो  गई. मचल  जाती  थी जो छोटी -छोटी  बातों पर  समझदारी की  पक्की  कड़ी  हो  गई  रहता था हर वक्त नाक पे जिसकी गुस्सा  ख़ुशमिज़ाज, अब वही नकचढ़ी हो  गई . समझा बोझ  जिसको पक्षपाती नज़र ने मुद्रिका  वो  नगीना ज़डी हो  गई . चेहरे  की  मुस्कान  बन  गई  वो सभी  की , वो  दिपावली की  फुलझड़ी  हो  गई . -अंशु चौहान 

'शराब "(poem)

चित्र
 दो घूंट ज़िन्दगी  की अब शराब  हो  गई  है  नियत आदमी की कितनी खराब  हो गई  है  हैँ हज़ार दलीलें ,बहाने ,बेबसी का  दम  भी  ज़मीर से इच्छाएँ बलवान हो गई हैँ  सुना था रोक लेती हैअपनो की परवाह पीने  से  हकीकत मेँ मगर ये ही,शराबियों का भगवान  हो गई  है  ना प्रेम का असर, ना कोई सीख काम करती  ये जूनून ,महाबली ,गुरु महान  हो  गई  है टूटते  परिवारों का  करूण  रुदन सी ये शौक ,मस्ती ,शक्ति ,शक्तिवान  हो  गई  है  किसी स्त्री की घुटन ,सिसकियाँ,बेचारगी  पुरूष  का ये उस पर अभिशाप हो  गई  है . स्वर्ग का हवाला ,देवताओं की मधुशाला  अधूरे ,असंयमित मनों का, अर्थ हीन गुणगान हो  गई  है . इंसानियत  की  दुश्मन , देह  को  घातक  अर्थव्यवस्था का  खोखला आधार हो गई  है . -Anshu Chauhan