भारत में' स्वच्छ्ता अभियान' सफल हो न हो परन्तु' गंदगी फैलाओ 'अभियान बिना किसी प्रयास के अवॉर्ड विनिंग सफलता अर्जित कर सकता है । गंदगी फैलाने में यहाँ के लोग इतने कुशल हैं कि क्या कोई ट्रेनिंग लेकर पारंगत होगा ।चलती गाड़ी में खिड़की से नीचे, नज़र बचा कर कचरा कैसे फेंका जाता है यहाँ के लोग बख़ूबी जानते हैं ।अगर किसी दिन आपको सड़क साफ़ दिखाई दे रही है तो कुछ देर में ही सफ़ाई के दुश्मन आयेंगे और कब वहाँ थूक कर ,चॉकलेट व चिप्स के खाली रैपर फ़ेंक कर गंदगी कर जायेंगे आपको पता ही नहीं चलेगा । । थूकने की आदत तो यहाँ इतनी प्रबल है कि शायद बिना जुर्माना लगाए व सख़्ती से प्रतिबंधित किए जाने तक इससे छुटकारा पाना असंभव है । हालात उस समय बद्तर हो जाते हैं जब आप दुपहिया वाहन से कहीं जा रहे हो और पास से गुज़र रही बस या अॉटो वाले का थूक सीधे आपके ऊपर आकर गिरता है । मुझे समझ में नहीं आता कि ऐसी हरक़त करते वक़्त इनको जरा सा भी ग़लत क्यों नहीं महसूस होता । सड़क पर खड़े होकर नाक साफ़ करना फिर उन्ही गंदे हाथों से कोई भी खाद्य्य सामग्री उठाकर किसी को देना व ख़ुद खा लेना बड़ा ही घृणास्पद कृत्य हैं । क्या इस तरह का मानसिक स्तर रखने वाले लोग देश में 'स्वच्छता अभियान ' को सफल होने देंगे ?
मनुष्य हो तो मनुष्य बन रहो
मृत्यु के भय से अगर सही को सही और गलत को गलत ना कह सको,तो सन्देह करो अपने मनुष्य होने पर . शक्तिशाली हो कर अगर किसी निर्बल की शक्ति न बन सको,तो संदेह करो अपने शक्तिशाली होने पर. संपन्न हो कर अगर मदद ना कर सको किसी निर्धन की,तो सन्देह करो अपनी सम्पन्नता पर . पुरुष हो कर अगर किसी नारी के सम्मान की रक्षा न कर सको,तो संदेह करो अपने पौरुष पर। धार्मिक हो कर भी अगर धर्म की रक्षा न कर सको, तो धिक्कार तुम्हारे धार्मिक होने पर. मनुष्य हो तो मनुष्य बन रहो इस धरा पर, सिर्फ देह मनुष्य की होना ही मनुष्यता नहीं, समझो इस ध्येय को तो इंसान हो तुम ना समझो तो चारा चर रहो कही। -
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