आज दोपहर के समय जब मैने अपने घर का दरवाजा खोला तो वहाँ एक पेपर पड़ा पाया मैने उत्सुकता वश उस पेपर को पूरा पढ़ डाला ,बाद में पता चला कि यह वही पेपर था जिसको लोग डर के मारे पूरा पढ़ने से डरते हैं । इस पेपर में लिखा था कि इसे पढ़ने वाला इसकी कॉपी २४ जनों में बाँट दे तो उसकी सभी मनोकामना पूरी होगी वरना २४ दिन बाद उसके साथ कुछ अनिष्ट हो सकता है । मै अंधविश्वासी बिलकुल नहीं हूँ क्योंकि मैं ईश्वर में गहरी आस्था रखती हूँ और ईश्वर के अलावा किसी अन्य में विश्वास नहीं करती हूँ । यूँ तो मैं हर चीज़ को तार्किक दृष्टि से सोचती व देखती हूँ परन्तु जँहा बात ईश्वर व उनके बनाये कुछ नेक बन्दों की होती है तो पूर्वाग्रही हो जाती हूँ । इस पेपर में ऐसे ही एक नेक बन्दे का जिक्र था जिनके बारे में आप सब ने भी काफी पढ़ा व सुना होगा ये नेक बंदे थे - ॐ बन्ना जी । पाली जिले के चोटिला गाँव के ये शख़्स बहुत ही नेक इंसान थे । १९८८ में सड़क दुर्घटना में इनकी मृत्यु हो गई थी ,ये तब मात्र २५ साल के ही थे । कहा जाता है कि उनकी बुलेट मोटर सायकिल जिससे उनका एक्सीडेंट हुआ था आज भी उसी जगह खड़ी है जहाँ वो दुर्घटना ग्रस्त हुए थे।इस बाइक को कई बार उस स्थान से हटाने की कोशिश की गई है मगर वह वापस उसी जगह आकर खड़ी हो जाती है । आज इस स्थान पर ॐ बन्ना जी का मंदिर बना हुआ है। कहते हैं जब से ये मंदिर बना है ओम बन्ना जी सभी आने जाने वालों का ध्यान रखते है व दुर्घटना ग्रस्त होने से बचाते हैं । कुछ भी हो परन्तु कुदरत के नेक बन्दों के, नेक कार्यों की सदैव सराहना व पूजा होनी चाहिए । आप यदि इस बात पर विश्वास करते हैं तो इसे शेयर करें, इसलिए की दुनिया में नेकी का व अच्छे काम करने वालों का प्रचार हो ।
मनुष्य हो तो मनुष्य बन रहो
मृत्यु के भय से अगर सही को सही और गलत को गलत ना कह सको,तो सन्देह करो अपने मनुष्य होने पर . शक्तिशाली हो कर अगर किसी निर्बल की शक्ति न बन सको,तो संदेह करो अपने शक्तिशाली होने पर. संपन्न हो कर अगर मदद ना कर सको किसी निर्धन की,तो सन्देह करो अपनी सम्पन्नता पर . पुरुष हो कर अगर किसी नारी के सम्मान की रक्षा न कर सको,तो संदेह करो अपने पौरुष पर। धार्मिक हो कर भी अगर धर्म की रक्षा न कर सको, तो धिक्कार तुम्हारे धार्मिक होने पर. मनुष्य हो तो मनुष्य बन रहो इस धरा पर, सिर्फ देह मनुष्य की होना ही मनुष्यता नहीं, समझो इस ध्येय को तो इंसान हो तुम ना समझो तो चारा चर रहो कही। -
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